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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 318 में से

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पृष्ठ 34

भारतवर्ष में लिखने के प्रचार की प्राचीनता. ५
'जातक' १ के पुस्तकों में खानगी २ तथा राजकीय ३ पत्रों, कर्ज़ा लेने वालों की तहरीरों ४ तथा
पोत्थक (पुस्तक) का ५, और कुटुंब संबंधी आवश्यक विषयों ६, राजकीय आदेशों ७ तथा धर्म के
नियमों ८ के सुवर्णपत्रों पर खुदवाये जाने का वर्णन मिलता है.
१. बुद्ध के पूर्वजन्मों की कथाओं को जातक कहते हैं. बौद्ध साहित्य में ऐसी प्रायः ५५० कथाओं का २२ निपातों
(अध्यायों) में बड़ा संग्रह है. प्रत्येक कथा के आरंभ में लिखा है कि जेतवन में अनाथपिंडिक के बाग में या अन्यत्र जब बुद्ध
विहार करते थे तब अमुक प्रसंग उठने पर उन्होंने यह कथा कही. कथा के पूर्ण होने पर बुद्ध ने बताया है कि इस समय के
(वर्तमान) मनुष्यों में से इस कथा के समय पूर्व जन्म में कौन कौन किस किस शरीर में थे और अंत में अपना भी पता दिया
है कि इस कथा का अमुक पात्र मैं था.
भरहुत के स्तूप के कटहरों पर इक्कीस जातकों के चित्र खुदे हुए हैं और उनपर नाम भी दिए हैं; एक पर तो जातक
में से गाथा का एक पाद ज्यों का त्यों खुदा हुआ है. यह स्तूप ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी का है अतएव जातकों का
इससे प्राचीन होना तो सिद्ध ही है; परंतु जिन राजाओं और नगरों का उनमें उल्लेख है वे नंद और मौर्यवंशी राजाओं के
पहले के हैं और पात्रों के आचार व्यवहार भी बुद्ध के बहुत पहले के जान पड़ते हैं, इससे यह मानना साहस नहीं है कि ई.स.
पूर्व की छठी शताब्दी या उससे भी पहले के समाज के चित्र जातकों की कथाओं में अंकित हैं. प्रोफेसर कॉवेल की संपादकत्ता
में ५४७ जातकों का अंगरेज़ी भाषांतर ६ जिल्दों में छप कर प्रकाशित हुआ है. मूल डॉक्टर फॉसबॉल् ने रोमन लिपि में
प्रकाशित किया है.
२. काशी के एक सेठ के गुलाम कटाहक ने जाली चिट्ठी (पण्ण=पर्ण=पन्ना=पत्र) से अपने आपको सेठ का पुत्र
सिद्ध करके एक दूसरे सेठ की पुत्री से विवाह कर लिया. उस पत्र पर उसने सेठ ही की मोहर (मुद्दिका=मुद्रिका) भी कर
ली थी (कटाहक जातक).
तक्खसिला (तक्षशिला) के विश्वविद्यालय के एक अध्यापक ने अपने पुराने छात्रों को पण्ण (=पत्र) लिखा (महासुतसोम
जातक).
३. एक राजा, जो राज्य छोड़कर वनवासी होगया था, एक ग्राम में जाकर रहा. वहां वालों ने उसका आतिथ्य अच्छा
किया जिस पर उसने अपने भाई को, जो राजा था, एक पण्ण भेजा कि इनका राजकर क्षमा कर दिया जावे (कामजातक).
काशी के एक राजा ने अपने निकाले हुए पुरोहित को फिर बुलाने के लिये एक गाथा लिख कर पण्ण भेजा और
उसपर राजमुद्दिका (राजमुद्रिका) से मोहर की (पुण्णनदी जातक).
पोतलि के राजा अस्सक (अश्मक) के मंत्री नंदिसेन ने एक सासन (शासन) लिख कर दंतपुर के राजा कालिंग का
आक्रमण रोका और कालिंग राजा लेख को सुन कर (लेखं सुत्वा) रुक गया (चुल्लकालिंग जातक).
सात राजाओं ने काशी को घेरा देकर राजा ब्रह्मदत्त को पण्ण भेजा कि राज्य छोड़ो या लड़ो. उसके उत्तर में राजा
के भाई असदिस (असदृश) ने बाण पर अक्षर (अक्खरानि) खोदे (अच्छिन्दि) और वह बाण ऐसे निशाने से मारा कि उनके
भोजनपात्रों पर लगा. उसमें लिखा था कि भाग जाओ नहीं तो मारे जाओगे (असदिस जातक.)
नामी चोर (जैसे आज कल पुलिस के रजिस्टर में 'नंबरी' बदमाश होते हैं) 'लिखितको चोरो,' अर्थात् जिसके बारे
में राज की ओर से लिखी हुई आज्ञा निकल चुकी हो, कहलाता था. ऐसे चोर बौद्धसंघ में आ आकर भरती होने लगे,
तब बुद्ध ने इस बखेड़े को रोका (महावग्ग १.४३).
४. एक देवालिये ने अपने लेवालियों को कर्ज़ की तहरीरों (इणपण्णानि = ऋणपर्ण) लेकर गंगातीर पर आकर
अपना पावना लेजाने के लिये बुलाया था (रुरुजातक).
५. बु; इ; पें; पृ. ५.
६. एक धनवान् ब्राह्मण का पुत्र अपनी विरासत सम्हालने गया और सोने के पत्र पर अपने पुरखाओं के लिखे धन के
बीजक के अक्षर (अक्खरानि) बांच कर उसने अपनी संपत्ति का परिमाण जाना (कण्ह जातक).
७. काशी के राजा की रानी खेमा ने स्वप्न में स्वर्णमृग देखा और कहा कि यदि मुझे यह न मिला तो मैं मर
जाऊंगी. इस पर राजा ने सोने के पत्र पर एक कविता खुदवा कर मंत्री को दी और कहा कि इसे सारे नगरवासियों को
सुना दो. उस कविता का भाव यह था कि जो कोई इस मृग का पता देगा उसे गांव और गहनों से भूषित स्त्रियां दी
जायेंगी (रुरुजातक).
८. राजा की आज्ञा से कुरु जाति के पांच प्रधान धर्म (अहिंसा, अस्तेय, परस्त्रीगमननिषेध, मिथ्याभाषणनिषेध
और मद्यपाननिषेध) सोने के पत्र पर खुदवाये गये (कुरुधम्म जातक).
बोधिसत्व की आज्ञा से विनिच्छयधम्म (विनिश्चयधर्म) भी ऐसे ही खुदवाये गये थे (तेसकुन जातक).