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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 302, कुल 318 में से

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पृष्ठ 302

Plate LXXV., लिपिपत्र ७५वां.
ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन और नवीन शैली के अंक.
प्राचीन शैली के अंक (१००० से ७०००० तक, और मिश्र अंक).
नानाघाट के लेख से. ई. स. पू. की दूसरी शताब्दी. | नासिक के लेखों से. ई. स. की १ली व २री शताब्दी. | वाकाटकों के दानपत्र से. ई. स. की ५वीं शताब्दी. | मिश्र अंक. भिन्न भिन्न शिलालेख और दानपत्रों से.
१०००
२०००
३०००
४०००
६०००
८०००
१००००
२००००
७००००
१५ | १२६ | १००१
२८ | २८६ | १००२
३३ | ३०१ | ११०१
४५ | ४२८ | १७००
५२ | ५३८ | ६००१
६२ | ६७६ | १०००१
७६ | ७०३ | १२/१२०००
८१ | ८१३ | २४४००
९३ | ९५५ |
ब्राह्मी से निकली हुई लिपियों के नवीन शैली के अंक (१ से ९ तक और ०).
गुर्जर दानपत्र सं. ई. स. ५८४. | राष्ट्रकूट दंतिदुर्ग के दानपत्र से. ई. स. ७५३. | राष्ट्रकूट शंकरगण के दानपत्र से. ई. स. ७९२. | प्रतिहार नागभट के लेख से. ई. स. ८१५. | प्रतिहार बाउक के जोधपुर के लेख से. ई. स. ८३७. | राष्ट्रकूट दंतिवर्मा के दानपत्र से. ई. स. ८६०. | प्रतिहार भोजदेव के लेख से. ई. स. ८७० के आसपास. | प्रतिहार भोजदेव के लेख से. ई. स. ८९६. | प्रतिहार महीपाल के लेख सं. ई. स. ९१७. | पुष्कर के लेख से. ई. स. ९२५.
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CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri