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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 301, कुल 318 में से

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पृष्ठ 301

Plate LXXIV. लिपिपत्र ७४ वां.
ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक.
(१०० से ९०० तक).

अशोक के लेखों से. ई० स० पूर्व की ३ री शताब्दी.नानाघाट के लेख से. ई० स० पूर्व की दूसरी शताब्दी.नासिक के लेखों से. ई० स० की १ ली व २ री शताब्दी.क्षत्रपों के सिक्कों से. ई० स० की दूसरी से चौथी शताब्दी.गुप्तों तथा उनके समकालीन राजाओं के लेखादि से. ई० स० की चौथी से छठीं शताब्दी.वलभी के राजाओं के दानपत्रों से. ई० स० की छठी से आठवीं शताब्दी.
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नैपाल के लेखों से. ई० स० की ८ वीं व ९ वीं शताब्दी.कलिंग के गंगवंशीयों के दानपत्र से. ई. स. की ७ वीं (?) से ८ वीं (?) शताब्दी.प्रतिहारों के दानपत्रों से. ई० स० की ९ वीं और १० वीं शताब्दी.भिन्न भिन्न लेखादि से. ई० स० की ५ वीं से ८ वीं शताब्दी.हस्तलिखित पुस्तकों से : बौद्ध पुस्तकों से.हस्तलिखित पुस्तकों से : जैन पुस्तकों से.
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CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri