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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 318 में से

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पृष्ठ 25

सूचीपत्र
लिपिपत्र २० वां—मेवाड़ के गुहिलवंशी राजा अपराजित के समय के लेख से.
" २१ वां—राजा हर्ष के दानपत्र तथा राजा अंशुवर्मन्, दुर्गगण आदि के लेखों से.
" २२ वां—चंबा के राजा मेरुवर्मन् के ५ लेखों से.
" २३ वां—प्रतिहारवंशी राजा नागभट, बाउक और कक्कुका के लेखों से.
(नागरी लिपि—लिपिपत्र २४-२७).
" २४ वां—जाईकदेव के दानपत्र, विजयपाल के लेख और हस्तलिखित पुस्तकों से.
" २५ वां—देवल, धार, उदयपुर (ग्वालियर) और उज्जैन के लेखों से.
" २६ वां—चंद्रदेव के दानपत्र, हस्तलिखित पुस्तक और जाजल्लदेव के लेख से.
" २७ वां—परमार धारावर्ष, चाहमान चाचिगदेव और गुहिल समरसिंह के समय लेखों से.
(शारदा लिपि—लिपिपत्र २८-३१).
" २८ वां—सराहां से मिली हुई सात्यकि के समय की प्रशस्ति से.
" २९ वां—सुंगल से मिले हुए राजा विदग्ध के दानपत्र से.
" ३० वां—भिन्न भिन्न दानपत्रों और शिलालेखों से.
" ३१ वां—कुलु के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से.
(बंगला लिपि—लिपिपत्र ३२-३५).
" ३२ वां—बंगाल के राजा नारायणपाल और विजयसेन के समय के लेखों से.
" ३३ वां—बंगाल के राजा लक्ष्मणसेन और कामरूप के वैद्यदेव के दानपत्रों से.
" ३४ वां—बल्लालेंद्र के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से.
" ३५ वां—हन्नाकोल के लेख और पुरुषोत्तमदेव के दानपत्र से.
(पश्चिमी लिपि—लिपिपत्र ३६-४०).
" ३६ वां—राजा नरवर्मन और कुमारगुप्त के समय के मंदसोर के लेखों से.
" ३७ वां—धरुनी के राजा ध्रुवसेन और धरसेन (दूसरे) के दानपत्रों से.
" ३८ वां—गहलक सिंहादित्य और वलभी के राजा शीलादित्य (पांचवें) के दानपत्रों से.
" ३९ वां—त्रैकूटकवंशी दईसेन और गुर्जरवंशी रणग्रह तथा दद्द (दूसरे) के दानपत्रों से.
" ४० वां—चालुक्य युवराज श्रयाश्रय (शीलादित्य) और राष्ट्रकूट कर्कराज के दानपत्रों से.
(मध्यप्रदेशी लिपि—लिपिपत्र ४१-४२).
" ४१ वां—वाकाटकवंशी राजा प्रवरसेन (दूसरे) के तीन दानपत्रों से.
" ४२ वां—पृथिवीसेन, महासुदेव और तिविरदेव के दानपत्रों से.
(तेलुगु-कनड़ी लिपि—लिपिपत्र ४३-५१).
" ४३ वां—पल्लववंशी राजा विष्णुगोपवर्मन् और सिंहवर्मन् के दानपत्रों से.
" ४४ वां—कदंबवंशी राजा मृगेशवर्मन् और काकुस्थवर्मन् क दानपत्रों से.
" ४५ वां—चालुक्यवंशी राजाओं के लेख और दानपत्रों से.
" ४६ वां—केंदूर से मिले हुए चालुक्यवंशी राजा कीर्तिवर्मन् (दूसरे) के दानपत्र से.
" ४७ वां—कडब से मिले हुए राष्ट्रकूटवंशी राजा प्रभूतवर्ष (गोविंदराज तीसरे) के दानपत्र से.
" ४८ वां—पूर्वी चालुक्यवंशी राजा भीम (दूसरे) और अम्म (दूसरे) के दानपत्रों से.
" ४९ वां—कोरमंगिल से मिले हुए पूर्वी चालुक्यवंशी राजराज के दानपत्र से.
" ५० वां—काकतीयवंशी राजा रुद्रदेव और गणपति के समय के लेखों से.
" ५१ वां—नामय नायक, अलवेम और गणादेव के दानपत्रों से.
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