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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 318 में से

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पृष्ठ 24

: सूचीपत्र.
लक्ष्मणसेन संवत् ... ... ... ... ... १८८—१८६
पुड्डुवैप्पु संवत् ... ... ... ... १८६
राज्याभिषेक संवत् ... ... ... ...१८६—१८७
बार्हस्पत्य संवत्सर ( १२ वर्ष का ) ... ... ... १८७
बार्हस्पत्य संवत्सर ( ६० वर्ष का ) ... ... ... १८७—१८६
ग्रहपरिवृत्ति संवत्सर ... ... ... ... ... १८६
सौर वर्ष ... ... ... ... ... १८६
चांद्रवर्ष ... ... ... ... ...१८६—१६०
हिजरी सन् ... ... ... ... ... १६०—१६१
शाहूर (अरबी, सूर) सन् ... ... ... ... १६१
फसली सन् ... ... ... ... ... १६२
विलायती सन् ... ... ... ... ... १६२
अमली सन् ... ... ... ... ... १६२
बंगाली सन् ... ... ... ... ... १६२—१६३
मगि सन् ... ... ... ... ... १६३
इलाही सन् ... ... ... ... ... १६३—१६४
ईसवी सन् ... ... ... ... ... १६४—१६५
परिशिष्ट में दिये हुए भिन्न भिन्न संवतों का ईसवी सन् से संबंध ... १६६
लिपिपत्र १-८४
(ब्राह्मी लिपि—लिपिपत्र १-१५).
लिपिपत्र पहिला—मौर्यवंशी राजा अशोक के गिरनार के चट्टान पर के लेख से.
,, दूसरा—मौर्यवंशी राजा अशोक के अन्य लेखों से.
,, तीसरा—रामगढ़, घोसुंडी, बेसनगर आदि के लेखों से.
,, चौथा—भट्टिप्रोलु के स्तूप के १० लेखों से.
,, पांचवां—पभोसा और मथुरा के लेखों से.
,, छठा—कुशन वंशी राजाओं के समय के मथुरा, सारनाथ आदि के लेखों से.
,, सातवां—शक उषवदात और उसकी स्त्री दत्तमित्रा के नासिक के ५ लेखों से.
,, आठवां—क्षत्रपवंशी राजा रुद्रदामन् के गिरनार के चट्टान के लेख से.
,, नवां—सातवाहन (आंध्र) वंशी राजाओं के नासिक के लेखों से.
,, १० वां—पश्चिमी क्षत्रप, त्रैकूटक और आंध्रवंशी राजाओं के सिक्कों से.
,, ११ वां—दक्षिण की भिन्न भिन्न गुफाओं के लेखों से.
,, १२ वां—अमरावती और जग्गयपेट के लेखों से.
,, १३ वां—मोयिडवोलु से मिले हुए पल्लववंशी शिवस्कंदवर्मन् के दानपत्र से.
,, १४ वां—कौंडमुडि से मिले हुए राजा जयवर्मन् के दानपत्र से.
,, १५ वां—हीरहडगल्ली से मिले हुए पल्लववंशी राजा शिवस्कंदवर्मन् के दानपत्र से.
(गुप्त लिपि—लिपिपत्र १६-१७).
,, १६ वां—गुप्तवंशी राजा समुद्रगुप्त के इलाहाबाद के स्तंभ के लेख से.
,, १७ वां—गुप्तों के समय के भिन्न भिन्न लेख और दानपत्रों से.
(कुटिल लिपि—लिपिपत्र १८-२३).
,, १८ वां—राजा यशोधर्मन् के समय के मंदसोर के लेख से.
,, १६ वां—प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकों तथा लेखादि से.
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