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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 214, कुल 318 में से

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पृष्ठ 214

अबुलफ़ज़ल ने 'अकबरनामे' में, तारीख इलाही के प्रसंग में लिखा है कि 'बंग (बंगाल) में
लछमनसेन (लक्ष्मणसेन) के राज्य के प्रारंभ से संवत् गिना जाता है. उस समय से अब तक
४६५ वर्ष हुए हैं. गुजरात और दक्षिण में शालिवाहन का संवत् है जिसके इस समय १५०६ और
मालवा तथा देहली आदि में विक्रम का संवत् चलता है जिसके १६४१ वर्ष व्यतीत हुए १ हैं'.
इससे शक संवत् और लक्ष्मणसेन संवत् के बीच का अंतर (१५०६-४६५ = ) १०४१ आता है.
डॉ. राजेंद्रलाल मित्र को मिले हुए 'स्मृतितत्त्वामृत' नामक हस्तलिखित पुस्तक के अंत में
'ल. सं. ५०५ शाके १५४६' लिखा है २. इससे भी शक संवत् और लक्ष्मणसेन संवत् के बीच का
अंतर (१५४६-५०५ = ) १०४१ आता है जैसा कि अबुलफ़ज़ल ने लिखा है.
नेपाल से मिले हुए 'नरपतिजयचर्या टीका' (स्वरोदयदीपिका) नामक हस्तलिखित पुस्तक के
अंत में शाके १५३६ ल सं ४६४ लिखा है ३. यदि यह शक संव