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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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भारतीय संवत्. १८१
विजय कर दोनों मल्लों ( जयदेवमल्ल और आनंदमल्ल ) को तिरहुत की तरफ़ निकाल दिया१.
इस कथन के अनुसार शक संवत् और नेवार संवत् के बीच का अंतर ( ८११-९= ) ८०२ और
विक्रम संवत् तथा नेवार संवत् के बीच का अंतर ( ९४६-९= ) ९३७ आता है.
नेपाल से मिले हुए दामोदर भट्ट रचित 'नवरत्नम्' नामक पुस्तक के अंत में शक संवत्
१६०७ मार्गशिर वदि अष्टमी, मघा नक्षत्र, सोमवार और नेपाल संवत् ८०६ लिखा है२. इसके
अनुसार शक संवत् और नेपाल संवत् के बीच का अंतर ( १६०७-८०६= ) ८०१ आता है.
डॉ. कीलहॉर्न ने नेपाल के शिलालेखों और पुस्तकों में इस संवत् के साथ दिये हुए मास,
पक्ष, तिथि, वार, नक्षत्र आदि को गणित से जांच कर ई. स. ८७९ तारीख २० अक्टोबर अर्थात् चैत्रादि
वि. सं. ९३६ कार्तिक शुक्ला १ से इस संवत् का प्रारंभ होना निश्चय किया है३. इससे गत नेपाल
संवत् में ८७८-७९ जोड़ने से ई. स