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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 21

. अंत में खरोष्ठी लिपि दी गई है. १ से

  • In image: "की समस्त वर्तमान (उर्दू के अतिरिक्त) लिपियां निकली हैं. अंत में खरोष्ठी लिपि दी गई है. १ से" - perfect.

Line 11:
७० तक के लिपिपत्रों के बनाने में क्रम ऐसा रक्खा गया है कि प्रथम स्वर, फिर व्यंजन, उसके

  • In image: "७० तक के लिपिपत्रों के बनाने में क्रम ऐसा रक्खा गया है कि प्रथम स्वर, फिर व्यंजन, उसके" - perfect.

Line 12:
पीछे क्रम से हलंत व्यंजन, स्वरमिलित व्यंजन, संयुक्त व्यंजन, जिह्वामूलीय और उपध्मानीय के

  • In image: "पीछे क्रम से हलंत व्यंजन, स्वरमिलित व्यंजन, संयुक्त व्यंजन, जिह्वामूलीय और उपध्मानीय के" - perfect.

Line 13:
चिह्नों सहित व्यंजन और अंत में 'ॐ' का सांकेतिक चिह्न (यदि हो तो) दिया गया है. १ से

  • In image: "चिह्नों सहित व्यंजन और अंत में 'ॐ' का सांकेतिक चिह्न (यदि हो तो) दिया गया है. १ से" - perfect.

Line 14:
५६ तक और ६५ से ७० तक के लिपिपत्रों में से प्रत्येक के अंत में अभ्यास के लिये कुछ पंक्तियां

  • In image: "५६ तक और ६५ से ७० तक के लिपिपत्रों में से प्रत्येक के अंत में अभ्यास के लिये कुछ पंक्तियां