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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 318 में से

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पृष्ठ 196

रिमाणे दुपज्जवसिसे से तं दावरजुम्मे । जेणं रासी
चयुक्केणं अवहारेणं अवहरिमाणे एकपज्जवसिसे से तं कलिजुगे । से तेणट्टेणं गोयम (१३७१-७२, भगवती सूत्र, 'गवामयन', पृ. ७२).
Wait! In the transcription, check line 36:
"अवहारेणं अवहरिमाणे दुपज्जवसिसे" - wait, in line 36, is it 'अवहरिमाणे'? Yes, "अवहरिमाणे".
† कृतेषु चतुर्षु वर्षशतेष्वष्टाविंशेषु ४०० २० ८ फाल्गुणा (न) बहुलस्य पंचदश्यामेतस्यां पूर्वांयां (फ्ली; गु. इं; पृ. २५३).
‡ शिलालेखादि में विक्रम संवत् के वर्ष बहुधा गत लिखे जाते हैं (ऐ. इं; जि. १, पृ. ४०६) वर्तमान बहुत कम. जब
कभी वर्तमान वर्ष लिखा जाता है तब एक वर्ष अधिक लिखा रहता है.
§ यातेषु चतुर्षु त्रि (कृ) तेषु शतेषु सौम्ये (म्ये) ष्वा (ष्ट्रा)शीतसोत्तरपदेष्विह वत्स [रेषु] । शुक्ले त्रयोदशदिने भुवि कार्त्तिक