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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 169, कुल 318 में से

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पृष्ठ 169

५३ (मावलीपुरम् का लेख ); पां. चौथे से बना."
Wait, "चौ. ५३" - yes, dot after चौ.

Line 20:
"त—ती. ५२; चौ. ५६."

Line 21:
"थ—दू. ११ (कार्ली के लेख ); ती. ५२ (कांचीपुरम् का लेख ); चौ. ५२ (कूरम् का दानपत्र ):"
Wait, colon or semicolon at the end of line 21?
It's a colon: : or semicolon ;? Looks like a colon :!

Line 22:
"पां. चौथे से बना."

Line 23:
"द—दू. ५२ (मामल्लपुरम् के लेख ); ती. ५३; चौ. ५६."

Line 24:
"ध—ती. ४३ (पिकिर का दानपत्र ); चौ. ५२ (कांचीपुरम् का लेख )."

Line 25:
"न—दू. १२ (जग्गयपेट के लेख ); ती. ५२ (कूरम् का दानपत्र ); चौ. ५४ (पृथ्वीपति का"

Line 26:
"दानपत्र ); पां. ५६."

Line 27:
"प—ती. ५४. फ—ती. ५३; चौ. ५६ (श्रीरंगम् का लेख )."

Line 28:
"ब—दू. १३; ती. ४५