प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२२ प्राचीनलिपिमाला.
क् = १. ख् = २. ग् = ३. घ् = ४. ङ् = ५. च् = ६. छ् = ७. ज् = ८. झ् = ९. ञ् = १०.
ट् = ११. ठ् = १२. ड् = १३. ढ् = १४. ण् = १५. त् = १६. थ् = १७. द् = १८. ध् = १९.
न् = २०. प् = २१. फ् = २२. ब् = २३. भ् = २४. म् = २५. य् = ३०. र् = ४०. ल् = ५०.
व् = ६०. श् = ७०. ष् = ८०. स् = ९०. ह् = १००. अ = १. इ = १००. उ = १००००.
ऋ = १००००००. ऌ = १००००००००. ए = १००००००००००. ऐ = १००००००००००००.
ओ = १००००००००००००००. औ = १००००००००००००००००.
इस शैली में स्वरों में ह्रस्व दीर्घ का भेद नहीं है. व्यंजन के साथ जहां स्वर मिला हुआ होता
है वहां व्यंजनसूचक अंक को स्वरसूचक अंक से गुणना १ होता है और संयुक्त व्यंजन के साथ जहां
स्वर मिला होता है वहां उक्त संयुक्त व्यंजन के प्रत्येक घटक व्यंजन के साथ वही स्वर माना जाता है
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