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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 318 में से

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पृष्ठ 149

१२० प्राचीनलिपिमाला.
श्लोकों में लाने में कठिनता रहती थी जिसको सरल करने के लिये संभवतः उक्त शास्त्रों के आचार्यों ने
संख्यासूचक सांकेतिक शब्द स्थिर किये हों. ये सांकेतिक शब्द मनुष्य के अंग, छंदों अथवा उनके
चरणों के अक्षर, देवता, साहित्य के अंग, ग्रह, नक्षत्र आदि एवं संसार के अनेक निश्चित पदार्थों
की संख्या पर से कल्पित किये गये हैं. प्रत्येक नाम के लिये संस्कृत भाषा में अनेक शब्द होने
से प्रत्येक संख्या के लिये कई शब्द मिलते हैं जिनमें से कुछ नीचे दिये जाते हैं—
०=शून्य, ख, गगन, आकाश, अंबर, अभ्र, वियत, व्योम, अंतरिक्ष, नभ, पूर्ण, रंध्र आदि.
१=आदि, शशि, इंदु, विधु, चंद्र, शीतांशु, शीतरश्मि, सोम, शशांक, सुधांशु, अब्ज, भू, भूमि,
क्षिति, धरा, उर्वरा, गो, वसुंधरा, पृथ्वी, क्ष्मा, धरणी, वसुधा, इला, कु, मही, रूप, पितामह, नायक,
तनु आदि.
२=यम, यमल, अश्विन, नासत्य, दस्र, लोचन, नेत्र, अक्षि, दृष्टि, चक्षु, नयन, ईक्षण, पक्ष,
बाहु, कर, कर्ण, कुच, ओष्ठ, गुल्फ, जानु, जंघा, द्वय, द्वंद्व, युगल, युग्म, अयन, कुटुंब, रविचंद्रौ आदि.
३=राम, गुण, त्रिगुण, लोक, त्रिजगत्, भुवन, काल, त्रिकाल, त्रिगत, त्रिनेत्र, सहोदराः,
अग्नि, वह्नि, पावक, वैश्वानर, दहन, तपन, हुताशन, ज्वलन, शिखिन्, कृशानु, होतृ आदि.
४=वेद, श्रुति, समुद्र, सागर, अब्धि, जलधि, उदधि, जलनिधि, अंबुधि, केंद्र, वर्ण, आश्रम,
युग, तुर्य, कृत, अय, आय, दिश् (दिशा) बंधु, कोष्ठ, वर्ण आदि.
५=बाण, शर, सायक, इषु, भूत, पर्व, प्राण, पांडव, अर्थ, विषय, महाभूत, तत्व, इंद्रिय,
रत्न आदि.
६=रस, अंग, काय, ऋतु, मासार्ध, दर्शन, राग, अरि, शास्त्र, तर्क, कारक आदि.
७=नग, अग, भूभृत्, पर्वत, शैल, अद्रि, गिरि, ऋषि, मुनि, अत्रि, वार, स्वर, धातु, अश्व, तुरग,
बाजि, छंद, धी, कलत्र, आदि.
८=वसु, अहि, नाग, गज, दंति, दिग्गज, हस्तिन्, मातंग, कुंजर, द्विप, सर्प, तक्ष, सिद्धि, भूति,
अनुष्टुभ्, मंगल आदि.
९=अंक, नंद, निधि, ग्रह, रंध्र, छिद्र, द्वार, गो, पवन आदि.
१०=दिश, दिशा, आशा, अंगुलि, पंक्ति, ककुभ, रावणशिरम्, अवतार, कर्मन् आदि.
११=रुद्र, ईश्वर, हर, ईश, भव, भर्ग, शूलिन्, महादेव, अक्षौहिणी आदि.
१२=रवि, सूर्य, अर्क, मार्तंड, द्युमणि, भानु, आदित्य, दिवाकर, मास, राशि, व्यय आदि.
१३=विश्वेदेवाः, काम, अतिजगती, अघोष आदि.
१४=मनु, विद्या, इंद्र, शक्र, लोक आदि.
१५=तिथि, घस्र, दिन, अहन्, पक्ष आदि.
१६=नृप, भूप, भूपति, अष्टि, कला आदि.
१७ = अत्यष्टि. १८ = धृति. १९ = अतिधृति. २० = नख, कृति.
२१ = उत्कृति, प्रकृति, स्वर्ग. २२ = कृती, जाति. २३ = विकृति.
२४ = गायत्री, जिन, अर्हत्, सिद्ध आदि. २५ = तत्व. २७ = नक्षत्र, उड्डु, भ आदि.
३२ = दंत, रद आदि. ३३ = देव, अमर, त्रिदश, सुर आदि.
४० = नरक. ४८ = जगती. ४६ = तान.