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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 131, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 131

, जिनमें से दो मिट्टी के

Line 15:
पात्रों पर स्याही से लिखे हुए⁶ हैं और तीसरा एक मूर्ति के नीचे⁷ खुदा है, तय्यार किया गया

Line 16:
है. तक्षशिला के रौप्यपत्र पर का लेख बिंदियों से खुदा है.

Line 17:
लिपिपत्र ७०वें की मूल पंक्तियों⁸ का नागरी अक्षरांतर—

Line 18:
स १०० २० १० ४ २⁹ अयस अपडस मसस दिवसे १० ४ १¹⁰ इऋ दिवसे
Wait, look at "इऋ": is it "इऋ" or "इश"?
In Kharosthi: "isa divase" (on this day).
In Naagari transcription:
Is that "इश" or "इऋ"?
Look at the character: it is 'इ' followed by 'श' or 'ऋ'?
Let's look at line 5:
"तथा 'य' और 'श' में स्पष्ट अंतर नहीं है"
Look at line 18:
"इ" followed by "श": wait, look at the loop: it has a loop with a tail, like 'श' or 'ऋ'?
Wait, in line 19: "लोताफ़िऋपुचन"? No! "लोताफ़िक़पुचन" or "लोताफ़िक्र"?
Wait, let's look at the Taxila silver scroll inscription:
"sa 1