सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 105, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 105

७६ प्राचीनलिपिमाला.
लकीर के दोनों पार्श्व में लगनेवाली बिंदियों को उक्त लकीर के परिवर्तित रूप के ऊपर लगा कर, बनाया
है और उसीसे वर्तमान शारदा का 'ई' बना है. 'ते' और 'थै' में 'ए' और 'ऐ' की मात्राएं
क्रमशः एक और दो आड़ी लकीरें व्यंजन के ऊपर लगा कर बनाई हैं. टाकरी लिपि में 'ए' और 'ऐ'
की मात्राएं अब तक ऐसी ही लगाई जाती है (देखो लिपिपत्र ७७).
लिपिपत्र ३० वें की मूल पंक्तियों¹ का नागरी अक्षरांतर—
ओं नमश्शिवाय ॥ जयति भुवनकारणं स्वयंभुज्जयति पुर-
न्दरनन्दनो सुरारिः [।] जयति गिरिसुतानिरुद्धदेहो...रितभयाप-
हरो हरश्च देवः ॥ श्रीचष्प(म्प)कावासकात्यसमब्रह्मग्यो लला-
तटघटितविकटभुकुटिपटककुटि(द्वि)तकट कसमटिककृतसाना-
लिपिपत्र ३१ वां.
यह लिपिपत्र कुलू के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र², अथर्ववेद³ (पिप्पलादशाखा) और शाकु-
न्तल नाटक⁴ की हस्तलिखित पुस्तकों से तय्यार किया गया है. अथर्ववेद की पुस्तक के अक्षरों का
'इ' प्राचीन 'इ' के '७°' इस रूप को नीचे के अंश से प्रारंभ कर चलती कलम से पूरा लिखने से ही
ऐसा बना है. उसीसे वर्तमान शारदा का 'इ' बना है. शाकुंतल नाटक से उद्धृत किये हुए अक्षरों
में से अधिकतर अर्थात् अ, आँ, ई, ऊ, ऋ, ओ, औ, क, ख, ग, च, छ, झ, ञ, ड, ढ, ण, त, थ, द,
ध, न, प, फ, ब, म, य, र, श, ष, स और ह अक्षर वर्तमान कश्मीरी से मिलते जुलते ही हैं (उक्त
अक्षरों को लिपिपत्र ७० में दी हुई वर्तमान शारदालिपि से मिला कर देखो).
लिपिपत्र ३१ वें की मूल पंक्तियों⁵ का नागरी अक्षरांतर—
ओं स्वस्ति ॥ रामरामरामपराक्रमपराक्रमण्डदक्षदक्षजा-
कांतनितांतचरणशरणकृतांतःकरणरणविशारद शारदद्वि-
मकरानुकारियशःपूरपूरितदिगंतरपरमभट्टारकमहाराजाधिरा-
जश्रीबहादुरसिंहदेवपादाः ॥ ॥ महाश्रीयुवराजप्रतापसिं-
हः महामंचिवर नारायणसिंहः ॥ श्रीचंपकपुरस्थमहापं-
१. ये मूल पंक्तियां राजा सोमवर्मा के कुलैत के दानपत्र से हैं.
२. आ. स. रि; ई. स. १९०३-४, प्लेट ७१ से. ३. हार्वर्ड ओरियंटल सिरीज में छपे हुए अथर्ववेद के अंग्रेज़ी
अनुवाद के साथ दी हुई उक्त पुस्तक के एक पत्रे की प्रतिकृति से.
४. बु; इं. पे; सेट ६, प्राचीन अक्षरों की पंक्ति ६ से.
५. ये मूल पंक्तियां कुलू के राजा बहादुरसिंह के दान पत्र से हैं.