प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)
Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 64, कुल 86 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रबोधसुधाकर
मन्दारपुष्पवासितमन्दानिलसेवितं परानन्दम् ।
मन्दाकिनीयुतपदं नमत महानन्ददं महापुरुषम् ॥ १८९ ॥
जो कल्पवृक्षके पुष्पोंकी गन्धसे युक्त मन्द-मन्द वायुसे सेवित
हैं, परमानन्दस्वरूप हैं तथा जिनके चरण-कमलोंमें श्रीगंगाजी
विराजमान हैं उन महानन्ददायक महापुरुषको नमस्कार करो ।
सुरभीकृतदिग्वलयं सुरभिशतैरावृतं सदा परितः ।
सुरभीतिक्षपणमहासुरभीमं यादवं नमत ॥ १९० ॥
जिन्होंने समस्त दिशाओंको सुगन्धित कर रक्खा है, जो
चारों ओरसे सैकड़ों कामधेनु गौओंसे घिरे हुए हैं तथा देवताओंके
भयको दूर करनेवाले और बड़े-बड़े राक्षसोंके लिये भयङ्कर हैं उन
यदुनन्दनको नमस्कार करो ।
कन्दर्पकोटिसुभगं वाञ्छितफलदं दयार्णवं कृष्णम् ।
त्यक्त्वा कमन्यविषयं नेत्रयुगं द्रष्टुमुत्सहते ॥ १९१ ॥
जो करोड़ों कामदेवोंसे भी सुन्दर है, वाञ्छित फलके देने-
वाले हैं, दयाके समुद्र हैं, उन श्रीकृष्णचन्द्रको छोड़कर ये नेत्र-
युगल और किस विषयको देखनेके लिये उत्सुक होते हैं।
पुण्यतमामतिसुरसां मनोऽभिरामां हरेः कथां त्यक्त्वा ।
श्रोतुं श्रवणद्वन्द्वं ग्राम्यकथामादरं वहति ॥ १९२॥
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