प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)
Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 58, कुल 86 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रबोधसुधाकर
ग्राम्यकथासूद्वेगः सुतीर्थगमनेषु तात्पर्यम् ।
यदुपतिकथावियोगे व्यर्थं गतमायुरिति चिन्ता॥१७४॥
अपने वर्णाश्रम-धर्मोंका आचरण करना, नित्य भगवान्
श्रीकृष्णचन्द्रकी प्रतिमाका उत्साहपूर्वक विविध सामग्रियोंसे पूजनो-
त्सव करना, निरन्तर हरि-भक्तोंका संग करना, भगवत्कथाओंके
सुननेमें अत्यन्त उत्साह रखना, सत्य भाषण करना तथा परस्त्री,
परधन और परनिन्दासे दूर रहना, अश्लील बातोंसे घृणा करना,
पुण्य-तीर्थ-स्थानोंमें जानेके लिये तत्पर रहना तथा 'भगवत्कथा-
श्रवणादिके बिना यह आयु व्यर्थ ही बीत गयी'—ऐसी चिन्ता
करना—ये सब स्थूल-भक्तिके लक्षण हैं ।
एवं कुर्वति भक्तिं कृष्णकथानुग्रहोत्पन्ना ।
समुदेति सूक्ष्मभक्तिर्यस्या हरिरन्तराविशति ॥१७५॥
इस प्रकार स्थूल-भक्तिका अभ्यास करते-करते भगवत्कथाके
अनुग्रहसे सूक्ष्म-भक्तिका उदय होता है, जिसके भीतर भगवान्की
उपलब्धि होती है ।
स्मृतिसत्पुराणवाक्यैर्यथाश्रुतायां हरेर्मूर्तौ ।
मानसपूजाभ्यासो विजननिवासेऽपि तात्पर्यम् ॥१७६॥
सत्यं समस्तजन्तुषु कृष्णस्यावस्थितेर्ज्ञानम् ।
अद्रोहो भूतगणे ततस्तु भूतानुकम्पा स्यात् ॥१७७॥
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