फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०८ फलदीपिका
७०. द्वि. च. (७-२०-० से ७-२३-२०) मि. वृ. मे. घ. म.
कुं. मी. मे. वृ.
७१. तृ. च. (७-२३-२० से ७-२६-४०) मि. सि. कर्क कन्या
तु. वृश्चि. मी. कु. म.
७२. च. च. (७-२६-४० से ८-०-०) घ. वृश्चि. तु. कन्या सिं.
कर्क मि. वृ. मे.
७३. मूल प्र. च. (८-०० से ८-३-२०) मे. वृ. मि. कर्क, सिं. कन्या,
तु. वृश्चि. ध.
७४. द्वि. च. (८-३-२० से ८-६-४०) भ. कुं. मी. वृश्चि. तु.
कन्या, कर्क, सिं. मि.
७५. तृ. च. (८-६-४० से ८-१०-०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध.
मे. वृ. मि.
७६. च. च. (८-१०-० से ८-१३-२०) कर्क सिं. कन्या, तु.
वृ. ध. म. कुं. मी.
७७. पूर्वाषाढ प्र. च. (८-१३-२० से ८-१६-४०) वृश्चि. तु. कन्या, कर्क,
सिं. मि. वृ. मे. मी.
७८. द्वि. च. (८-१६-४० से ८-२०-०) कुं. म. ध. मे. वृ. मि.
कर्क, सिं. कन्या.
७९. तृ. च. (८-२०-० से ८-२३-२०) तु. वृश्चि. ध. म. कुं.
मी. वृश्चि. तु. कन्या
८०. च. च. (८-२३-२० से ८-२६-४०) कर्क, सिं. मि. वृ. मे.
मी. कुं. म. ध.
८१. उत्तराषाढ प्र. च. (८-२६-४० से ९-०-०) मे. वृ. मि. कर्क, सिं.
कन्या, तु.० वृश्चि. ध.