फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबाईसवाँ अध्याय : मिश्रदशा ५०७
५७. स्वाती प्र. च. (६-६-४० से ६-१०-०) मे. वृ. मि. कर्क, सिं.
कन्या, तु. वृश्चि. ध.
५८. द्वि. च. (६-१०-० से ६-१३-२०) मं. कुं. मी. वृश्चि. तृ.
कन्या, कर्क, सिं. मि.
५९. तृ. च. (६-१३-२० से ६-१६-४०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध.
मे. वृ. मि.
६०. च. च. (६-१६-४० से ६-२०-०) कर्क, सिं. कन्या, तु.
वृश्चि. ध. म. कुं. मी.
६१. विशाखा प्र. च. (६-२० से ६-२३-२०) ध. म. कुं. मी. मे. वृ.
मि. सिं. कर्क
६२ द्वि. च. (६-२३-२० से ६-२६-४०) कन्या. तु. वृश्चि.
मी. कुं. म. ध. वृश्चिव. तु.
६३. तृ. च. (६-२६-४० से ७-०-०) कन्या, सिं. कर्क मि. वृ.
मे. ध. म. कुं.
६४. च. च. (७-०-० से ७-३-२०) मी. मे. वृ. मि. सिं. कर्क,
कन्या, तु. वृश्चि.
६५. अनुराधा प्र. च. (७-३-२० से ७-६-४०) मी. कुं. म. ध. वृश्चि. तु.
कन्या, सिं. कर्क
६६. द्वि. च. (७-६-४० से ७-१०-०) मि. वृ. मे. ध. म. कुं.
मी. मे. वृ.
६७. तृ. च. (७-१०-० से ७-१३-२०) मि. सिं. कर्क कन्या,
तु. वृश्चि. मी. कुं. म.
६८. च. च. (७-१३-२० से ७-१६-४०) ध. वृश्चि. तु. कन्या,
सिं. कर्क मि. वृ. मे.
६९. ज्येष्ठा प्र. च. (७-१६-४० से ७-२०-०) मी. कुं. म. ध. वृश्चि.
तु. कन्या, सिं. कर्क