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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 510, कुल 684 में से

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पृष्ठ 510

बाईसवाँ अध्याय : मिश्रदशा ५०९
८२. द्वि. च. (९-०-० से ९-३-२०) मं. कुं. मी. वृश्चि. तु. कन्या
कर्क सिं. मि.
८३. तृ. च. (९-३-२० से ९-६-४०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध. मे.
वृ. मि.
८४. च. च. (९-६-४० से ९-१०-०) कर्क, सिं. कन्या, तु.
वृश्चि. ध. म. कुं. मी.
८५. श्रवण प्र. च. (९-१०-० से ९-१३-२०) ध. म. कुं. मी. मे. वृ.
मि. सिं. कर्क
८६. द्वि. च. (९-१३-२० से ९-१६-४०) कन्या तु. वृश्चि. मी.
कुं. म. ध. वृश्चि. तु.
८७. तृ. च. (९-१६-४० से ९-२०-०) कन्या, सिं. कर्क, मि.
वृ. मे. ध. म. कुं.
८८. च. च. (९-२०-० से ९-२३-२०) मी. मे. वृ. मि. सिं. कर्क,
कन्या, तु. वृश्चि.
८९. धनिष्ठा प्र. च. (९-२३-२० से ९-२६-४०) मी. कुं. म. ध. वृश्चि.
तु. कन्या, सिं. कर्क
९०. द्वि. च. (९-२६-४० से १०-०-०) मि. वृ. मे. ध. म. कुं.
मी. मे. वृ.
९१. तृ. च. (१०-०-० से १०-३-२०) मि. म. कर्क, कन्या,
तु. वृश्चि. मी. कुं. म.
९२. च. च. (१०-३-२० से १०-६-४०) ध. वृश्चि. तु. कन्या
सिं. कर्क मि. वृ. मे.
९३. शतभिषा प्र. च. (१०-६-४० से १०-१०-०) मी. कुं. म. ध. वृश्चि.
तु. कन्या, सिं. कर्क