फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०६ फलदीपिका
४५. उत्तरा फाल्गुनी प्र. च. (४-२६-४० से ५-०-०) मी. कुं. म. ध.
वृश्चि. तु. कन्या, सिंह, कर्क
४६ द्वि. च. (५-०-० से ५-३-२०) मि. वृ. मे. ध. म. कुं. मी.
मे. वृ.
४७. तृ. च. (५-३-२० से ५-६-४०) मि. सिं. कर्क, कन्या, तु.
वृश्चि. मी. कुं. म.
४८. च. च. (५-६-४० से ५-१०-०) ध. वृश्चि. तु. कन्या,
सिं. कर्क, मि. वृ. मे.
४९. हस्त प्र. च. (५-१०-० से ५-१३-२०) मे. वृ. मि. कर्क, सिं.
कन्या, तु. वृश्चि. ध.
५०. द्वि. च. (५-१३-२० से ५-१६-४०) म. कुं. मी. वृश्चि.
तु. कन्या, कर्क, सिं. मि.
५१. तृ. च. (५-१६-४० से ५-२०-०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध.
मे. वृ. मि.
५२. च. च. (५-२०-० से ५-२३-२०) कर्क, सिं. कन्या, तु.
वृश्चि. ध. मं. कुं. मी.
५३. चित्रा प्र. च. (५-२३-२० से ५-२६-४०) वृश्चि. तु. कन्या,
कर्क, सिं. मि. वृ. मे. मी.
५४. द्वि. च. (५-२६-४० से ६-०-०) कुं. म. ध. मे. वृ. मि.
कर्क, सिंह, कन्या
५५. तृ. च. (६-०-० से ६-३-२०) तु. वृश्चि. ध. म. कुं. मी.
वृश्चि. तु. कन्या
५६. च. च. (६-३-२० से ६-६-४०) कर्क, सिं. मि. वृ. मे. मी.
कुं. म. ध.