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सर्वकोश
पाटीगणित (श्रीधराचार्य - प्राचीन संस्कृत टीका एवं प्रो. कृपाशंकर शुक्ल सविस्तार व्याख्या)

पाटीगणित (श्रीधराचार्य - प्राचीन संस्कृत टीका एवं प्रो. कृपाशंकर शुक्ल सविस्तार व्याख्या)

Patiganita of Sridharacharya with Commentary

श्रीधराचार्य (सम्पादक: प्रो. कृपाशंकर शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished337 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 337 में से

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पृष्ठ 58

तु" or "केवलास्तु"?
Look at line 18: "केवलास्तु" - wait, look at 'स्तु':
It has 'स' and 'तु' below: 'स्तु'!
Wait, there is a small smudge or it's 'केवलास्तु'. Yes, "केवलास्तु".

Line 19:
तदीयाः पञ्च भेदा नाधिकीभवन्ति । जातीनां निजभेदानपास्य एषा भेदगणना । अन्यथा

Line 20:
भागजातौ⁸ द्वे, प्रभागः, भागभागः, स्वभागानुबन्धः, परभागानुबन्धः, स्वभागापवाहः, परभागा-
Note 8 is after भागजातौ⁸ (in text: भागजाती⁸ or भागजातौ⁸? Footnote says: "⁸ भागजाति ।" so text has "भागजातौ⁸" or "भागजाती⁸" - let's look: it has a matra on top with two slants or one? It has 'au' matra: भागजातौ⁸).

Line 21:
पवाहः, स्वभागानुबन्धवल्ली, स्वभागापवाहवल्ली, भागानुबन्धभागापवाहौ मिश्रितावेव

Line 22:
स्वपरभेदाद् द्वाविति, भागमातेति, एतेषामेकाशीतिशतानि एकनवत्यधिकानि भेदा भवन्ति

Line 23:
८१६१ । एवं