परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
DevanagariHindipublished320 पृष्ठ
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४६ परशुरामकल्पसूत्रम्
जो इतना जान गया, वह धन्य हो गया, यह समझना चाहिये। गुरुमन्त्र
मिल जाने पर शिष्य सौर-वैष्णव आदि सात करोड़ मन्त्रों का अधिकारी हो
जाता है। इस उपदेश से सारा ज्ञानविज्ञानोपदेश हो गया। यह दृढ़ता ही शिष्य
का अधिकार है। इस प्रकार यह दीक्षाविधि-प्रकरण जो प्रारम्भ किया गया था,
अब सम्पन्न हो गया। यह अर्थ अन्त में आये 'शिवम्' इस अमृत प्रयोग
का है।।४३।।
।।श्रीरामेश्वरकृत मुख्यांश सौभाग्योदयवृत्तिसहित
डॉ. परमहंसमिश्रकृत नीर-क्षीर-विवेक भाषा-भाष्य-समन्वित
श्रीपरशुरामकल्पसूत्र का दीक्षाविधि-नामक प्रथम खण्ड परिपूर्ण ।।१।।
।। शुभं भूयात् ।।