परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदीक्षाविधिः ४१
यह मातृका यन्त्र है। इसकी विधि इस चित्र से स्पष्ट है। पूरी संस्कृत
विवृति में यही क्रम बताया गया है। बीच में एक वृत्त बनाइये। उसमें
ह्सौः लिख दीजिये। उसके ऊपर एक बड़ा वृत्त बनाइये। उस वृत्त के ऊपर
कमलपत्तों के समान बराबर-बराबर आठ दल बनाइये। पूर्व दक्षिण पश्चिम उत्तर
कमल दलों का स्पर्श करती चार ऐसी सीधी रेखायें खींचिये, जिससे एक
समचतुर्भुज बन जाय। इस चित्र में जैसे अक्षर लिखे हुए हैं। उसे अपने द्वारा
निर्मित चित्र में भर दीजिये। मातृका यन्त्र तैयार। इसी के बीच में शिष्य को
बिठलाना चाहिये। उसी कलश के पावन जल से शिष्य को श्रीविद्या मूलमन्त्र,
श्यामा मूलमन्त्र और वार्त्ताली मूलमन्त्र से स्नान कराना चाहिये। इसे पूर्णाभिषेक
कहते हैं॥३८॥
मान्त्रीं दीक्षामुपसंहरति
सदुकूलं सालेपं साभरणं समालं सुप्रसन्नं शिष्यं पार्श्वे निवेश्य
मातृकां तदङ्गे विन्यस्य विमुक्त-मुखकर्पटस्य तस्य हस्ते त्रीन् प्रथम-
सिक्तान्