परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६ )
२६८ २० श्रुतधारिणी विद्या २३९
२६९ २१ सर्वज्ञताकरी विद्या २३९
२७० २२ पाँच रश्मियों का भावन २४०
२७१ २३ लोपामुद्रोपास्य शिवादि हादिविद्या स्वरूप-
प्रकाशनविद्या २४०
२७२ २४ षट्कूटा सम्पत्करी विद्या कालसङ्कर्षिणी २४०-२४१
२७३ २५ परमायुःप्रदायिनी विद्या २४१-२४२
२७४ २६ शुद्धज्ञानमयी शाम्भवी विद्या २४२-२४३
२७५ २७ पराविद्या २४३
२७६ २८ पञ्चमन्त्राधिष्ठान २४३
२७७ २९ बाला या कुमारी विद्या २४३-२४४
२७८ ३० अन्नपूर्णा विद्या २४४
२७९ ३१ अश्वारूढ़ा प्रत्यङ्गविद्या २४४
२८० ३२ श्रीपादुका विद्या २४५
२८१ ३३ मूलाधारविलोचनीया विद्या २४५-२४६
२८२ ३४ मूलविद्या २४६
२८३ ३५ लघुश्यामा २४६
२८४ ३६ वाग्वादिनी विद्या २४६-२४७
२८५ ३७ नकुली श्यामा विद्या २४७
२८६ ३८ श्यामा पादुकाविद्या २४७
२८७ ३९ हृदय में ध्यातव्य श्यामा २४८
२८८ ४० श्यामाविद्या (८९ वर्णमयी) २४८-२४९
२८९ ४१ लघुवार्त्ताली विद्या २४९
२९० ४२ स्वप्न वार्त्ताली २४९
२९१ ४३ तिरस्करिणी २४९-२५०
२९२ ४४ वार्त्ताली पादुका २५०