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परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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( १८ )
९० ५ ६४ उपचारों का प्रकल्पन १०२-१०५
९१ ६ नव मुद्रायें १०५-१०६
९२ ७ मूल से त्रिधा सन्तर्पण १०६
९३ ८ देवी का षडङ्ग पूजन १०६-१०७
९४ ९ नित्यापूजन १०७-१११
९५ १० ओघत्रयपूजन १११-११२
पञ्चमः खण्डः ललितानवावरणपूजाक्रमः ११३-१३३
९६ १ प्रथमावरण व्यष्टि-पूजा ११३-११५
९७ २ समष्टिपूजा ११५-११६
९८ ३ करशुद्धि मन्त्र, त्रिपुराचक्रेश्वरी का परामर्श
संक्षोभिणी मुद्रा-प्रदर्शन ११६-११७
९९ ४ द्वितीयावरण-पूजा ११७-११८
१०० ५ तृतीयावरण-पूजा ११८-११९
१०१ ६ चतुर्थावरण-पूजा ११९-१२०
१०२ ७ पञ्चमावरण-पूजा १२०-१२१
१०३ ८ षष्ठावरण-पूजा १२१-१२२
१०४ ९ सप्तमावरण-पूजा १२२-१२३
१०५ १० आयुध-पूजा १२३
१०६ ११ अष्टमावरण-पूजा १२३-१२४
१०७ १२ कामेश्वरी आदि शक्तियों की मूलदेवी
से अभिन्नता १२४-१२५
१०८ १३ अतिरहस्य योगिनियों का चक्रावस्थान,
त्रिपुराम्बा का भावन और पराबीजमुद्राकृति १२५-१२६
१०९ १४ नवमावरण-पूजा १२६
११० १५ नवावरणपूजोपरान्त धूप-दीपादि समर्पण १२७-१२८
१११ १६ कामकलाध्यान १२८