परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 313, कुल 320 में से
संदर्भ में पढ़ेंसर्वसाधारणक्रमः २७१
सर्वयज्ञों का यष्टा माना जाता है, जिससे इसके इष्ट की सिद्धि होती है। यह
परम्परा से श्रुत सत्य है। इससे विश्व का कल्याण हो।।८३।।
खण्डादिपरिपठनम्
अथातः सर्वेषां मन्त्राणाम्, अथ स्वेष्टमन्त्रस्य, इति विधिवत्,
इत्थं साङ्गम्, इयमेव महती विद्या। अथ प्राथमिके चतुरस्रे, अथ
हृच्चक्रस्थिताम्। एवं गणपतिमिष्ट्वा। इत्थं सद्गुरोः, अथातो दीक्षां
व्याख्यास्यामः। अथ, एवम्, अथ, इत्थम्। अथ स्वेष्टेति
पञ्च ।।८४।।
अथातः सर्वेषां मन्त्राणाम्, अथातो दीक्षाम् इत्यनेन खण्डविभागमुक्त्वा
पटलानुक्रमणिकां दर्शयति—अथेत्यारभ्य खण्डद्वयानन्तरं तृतीयखण्डादारभ्य
एवमिति। अथ १. एवं, २. अथ, ३. इत्थं, ४. अथ स्वेष्टम्, ५. एवमेकैकं
पटलं खण्डद्वयात्मकं ज्ञेयम् ।।८४।।
प्रथम पटल—दीक्षाविधि—अथ से प्रारम्भ—अथातो दीक्षां सूत्र में
द्वितीय पटल—गणनायक-पद्धति—इत्थं से प्रारम्भ—इत्थं सद्गुरोः सूत्र में
तृतीय पटल—श्रीक्रम-पद्धति—एवं से प्रारम्भ—एवं गणपतिम् सूत्र में
चतुर्थ पटल—ललिता-क्रम—अथ से प्रारम्भ—अथ हृच्चक्र सूत्र में
पञ्चम पटल—अनावरणपूजा—अथ से प्रारम्भ—अथ प्राथमिके सूत्र में
षष्ठ पटल—श्यामाक्रम—इयम् से प्रारम्भ—इयमेव महती सूत्र में
सप्तम पटल—वाराही-क्रम—इत्थं से प्रारम्भ—इत्थं साङ्गं सूत्र में
अष्टम पटल—पराक्रम—इति से प्रारम्भ—इति विधिवत् सूत्र में
नवम पटल—होम-विधि—अथ से प्रारम्भ—अथ स्वेष्टमन्त्र सूत्र में
दशम पटल—सर्वसाधारणक्रम—अथ से प्रारम्भ—अथातः सर्वेषां सूत्र में।
इस तरह पाँच खण्ड का आकलन, इन प्रारम्भ में प्रयुक्त अव्यय शब्दों
से हो जाता है। १. अथ से प्रथम-द्वितीय, २. एवं से तृतीय-चतुर्थ, ३. अथ
से पञ्चम-षष्ठ, ४. इत्थं से सप्तम-अष्टम और ५. अथ से नवम-दशम। इस