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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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पृष्ठ 304

२६२ परशुरामकल्पसूत्रम्
सर्वत्र कुलशास्त्रविहितक्रियासामान्ये अस्मिन् शास्त्रे विहितं किं
अविहितं किम् इति परिशोध्य सप्रमाणं कर्म अनुष्ठेयमिति भावः।।६४।।
वचन का अर्थ शास्त्रोक्त प्रमाण वाक्य है। उपासक विहित और अविहित
के सम्बन्ध में शास्त्र वचनों के आधार पर ही आचरण करे।।६४।।
अन्यं धर्ममाह
दशकुलवृक्षानुपप्लवः ।।६५।।
श्लेष्मातककरञ्जाम्रनिम्बाश्वत्थकदम्बका बिल्ववटोडुम्बरौ च तिन्तिण्या
सहिता दश। श्लेष्मातक (लिसोडे का वृक्ष) करञ्ज (ओषधिवृक्ष) आम्र (आम)
निम्ब (नीम) अश्वत्थ (पीपल) कदम्बक (कदम्ब) बिल्व (श्रीफल) वट
(बरगद) उदुम्बर (गूलर) ये दश वृक्ष कुल वृक्ष माने जाते हैं। इनका काटना
नितान्त निषिद्ध है।।६५।।
धर्मान्तरमाह
स्त्रीवृन्दादिमकलशसिद्धलिङ्गिक्रीडाऽऽकुलकुमारीकुलसहकारा-
शोकैकतरुपरेतावनिप्रमत्तवेश्याश्यामारक्तवसनामत्तेभानां दर्शने
वन्दनम्।।६६।।
स्त्रीवृन्दं सुवासिनीवृन्दं न तु विधवानाम्, सुवासिनी-कुमारीणां समूहं
मदिराघटम् इति तन्त्रान्तरवचनात्। आदिमकलशं मदिरापूर्णघटः। सिद्धाः
मन्त्रसिद्धिमन्तः, तेषां लिङ्गानि तच्छालीनः सिद्धलिङ्गिनः। क्रीडासु आकुलाः
व्यासक्ता कुमार्यस्तासां कुलं समूहः। सहकारः अतिसुगन्धिचूतः। अशोकः
प्रसिद्धः। एकतरुः। परेतावनिः श्मशानम्। मत्तवेश्या। श्यामा यौवनमध्यस्था
तारुण्यनिर्भरा। रक्तवसना। मत्तेभः प्रसिद्धः। एतेषां दर्शने वन्दनं नमनं
कुर्यात् ।।६६।।
सुवासिनी स्त्रियों का समूह, कुमारियों का समूह, मदिरा कलश, मन्त्रसिद्ध
योगियों के चिह्न, क्रीडाकुमारियाँ, आम, अशोक और 'एकतरु' नाम से प्रसिद्ध
एक विशेष वृक्ष, श्मशान, मदविह्वल वेश्या, पूर्ण-यौवना षोडशी और रक्तवस्त्र-