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परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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( १५ )
३६ ३६ शाक्ती दीक्षा ३५-३७
३७ ३७ मान्त्री दीक्षा ३७-३९
३८ ३८ मातृका यन्त्र ३९-४१
३९ ३९ मान्त्री दीक्षा का उपसंहार ४१-४२
४० ४० गुरुकर्तृक शेष कर्म का निर्देश ४२-४३
४१ ४१ गुरुपादुका मन्त्र ४३-४४
४२ ४२ आचारानुशासन सन्दर्भ में शिष्य के प्रति
कर्त्तव्य का निर्देश ४४
४३ ४३ शिष्य का कर्त्तव्य ४५-४६
द्वितीयः खण्डः महागणपति-क्रमः ४७-६५
४४ १ गणपति उपासना पद्धति का परामर्श ४७-४८
४५ २ श्रीगणपति उपासना प्रकार ४८-५१
४६ ३ देवतर्पण का उपदेश ५१-५३
४७ ४ पूजाविधि ५३-५५
४८ ५ अर्घ्यस्थापन विधि ५५-५७
४९ ६ करणीय कार्य ५७-५८
५० ७ पीठनियमपूर्वक यन्त्रोद्धार ५८-६०
५१ ८ प्रधान एवं सह मिथुन देवतर्पण ६०-६२
५२ ९ गणपति उपतर्पण और जप आदि ६२-६३
५३ १० गणपति के स्वात्मविलापन के सन्दर्भ में
हवन आदि का विधान ६३-६५
तृतीयः खण्डः श्रीक्रमः श्रीललिताधिकारः ६६-९७
५४ १ शक्ति चक्रैक नायिका श्रीललिता का क्रमारम्भ ६६-६८
५५ २ ब्राह्ममुहूर्त्त में जागकर परमशिवरूप
गुरुदेव का स्मरण ६८-६९