सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 320 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 272

२३० परशुरामकल्पसूत्रम्
का नाम ही सर्वसाधारण-क्रम रखा गया है। इसमें गणपति, ललिता, श्यामा,
वार्त्ताली मन्त्रों के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण किया गया है॥१॥
अथ श्यामाक्रमे पठितानि कानिचिदङ्गानि अतिदिशति वचनेन
श्यामावत् सन्ध्याद्यर्घ्यशोधनपर्यन्तं न्यासवर्जम् ॥२॥
सन्ध्यादीत्यनेन सन्ध्यातः प्राक् पठितानां व्यावृत्तिः। अर्घ्यशोधन-
पर्यन्तम् इत्यनेन तदग्रिमव्यावृत्तिः। उभयमध्यतनानां मध्ये न्यासवर्जम् इत्यनेन
तद्व्यावृत्तिः। अर्घ्यशोधनम् इत्यविशेषोक्त्या विशेषार्घ्यशोधनान्तं कार्यम्। तेन
ब्राह्मे मुहूर्त्ते यत्कृत्यं स्नानदन्तधावनविंशतिगण्डूषादि सर्वं निवर्त्तते॥२॥
सन्ध्या से लेकर अर्घ्यशोधन पर्यन्त सारे कार्य श्यामा की तरह किये
जाने चाहिये। सूत्रकार ने इसके बीच में आये न्यास का वर्जन कहकर मध्य
के अन्य कार्य ही करणीय हैं, ऐसा इङ्गित किया है॥२॥
सर्वसाधारणन्यासमाह
अनुक्तषडङ्गस्य षड्जातियुक्तमायया षडङ्गम्॥३॥
अनुक्तेत्यनेन अज्ञातमप्युपलक्षणीयम्। इत्थं च यस्य मन्त्रस्य
षडङ्गमुक्तम्, तेन स्वषडङ्गे श्यामाक्रमे न्याससमये न्यसेत्। यस्यानुक्तमज्ञातं वा
तत्र षड्जातियुक्तमायया षडङ्गन्यासः। षड्जातिमाया च 'हां हीं हूं हैं हौं हः'
इति क्रमेण षडङ्गेषु योज्यम्॥३॥
वृत्तिकार के अनुसार अनुक्त शब्द से अज्ञात अर्थ भी लगाना चाहिये।
इस प्रकार जिस मन्त्र का षडङ्ग कहा गया है, उस स्थान पर श्यामा क्रम
में अपने ६ अङ्गों पर न्यास करना चाहिये। जिसका षडङ्ग अनुक्त या अज्ञात
हो वहाँ षड्जातियुक्त माया (हां हीं हूं हैं हौं हः) से न्यास करना
चाहिये॥३॥
चक्रनिर्माणमाह
बिन्दुत्रिषडरनागदलचतुष्पत्रचतुरस्रमयं चक्रम्॥४॥
अष्टदलं चतुर्दलं, पद्मद्वयं शेषं स्पष्टम्॥४॥