परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२८ परशुरामकल्पसूत्रम्
भस्मधारणादिकमाह
तद्भस्मतिलकधरो लोकसम्मोहनकरः सुखी विहरेत्। इति
शिवम्॥२९॥
तद्भस्म अग्नेर्भस्म। अग्निविसर्जनानन्तरं परिस्तरणपरिधीना-मपि
विसर्गः। प्रतिपत्तिसंस्कारस्यानुक्तत्वात्। शिवमिति व्याख्यातम्॥२९॥
।। इति श्रीपरशुरामकल्पसूत्रे श्रीरामेश्वरनिर्मितायां श्रीपरशुरामकल्पसूत्रवृत्तौ
सौभाग्योदयनाम्यां (मुख्यांशमात्रायां) होमविधिर्नाम
नवमः खण्डः सम्पूर्णः॥९॥
भस्म धारण एक महत्त्वपूर्ण कार्य है। इसमें सभी पाप भस्मसात् हो जाते
हैं। लोग उसे देखकर प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार विश्वविहार सिद्ध हो जाता
है॥२९॥
।। श्रीरामेश्वरकृत मुख्यांश-सौभाग्योदयवृत्तिसहित
डॉ. परमहंसमिश्रकृत नीर-क्षीर-विवेक भाषा-भाष्य-समन्वित
श्रीपरशुरामकल्पसूत्र का होमविधि नामक नवम खण्ड परिपूर्ण ॥९॥
।। शुभं भूयात्।।