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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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पृष्ठ 268

२२६ परशुरामकल्पसूत्रम्
१०. कवित्व नन्द्यावर्त्त (तगर)
११. पुष्टि वञ्जुल (अशोक)
१२. भाग्य मल्लिका, चमेली, पुन्नाग
१३. ऐश्वर्य बन्धूक, जपा, किंशुक, बकुल और
मधूक (महुवा)
१४. आकर्षण लवण
१५. सर्ववशीकरण कदम्बपुष्प
१६. धान्यवृद्धि शालितण्डुल
१७. सौभाग्य-संवर्धन कुङ्कुम-गोरोचन
१८. तेजोवृद्धि पलाशपुष्प अथवा कपिला घी
१९. उन्माद धतूर का फूल
२०. शत्रुनाश विषवृक्ष, नीम, श्लेष्मातक (बहुआर),
विभीतक (भिलावा)
२१. मारण नीमतेल में सने नमक
२२. विद्वेषण काक और उलूक पक्ष
२३. कासश्वासनाश तिलतेल में सने मरिच (काली मिर्च)
इन त्रयोविंश काम्य पूर्ति के लिये सामने दिये गये पुष्प या समिधाओं
से हवन करना चाहिये॥२४॥
अथोत्तराङ्गमाह (बलिदानम्)
बलिं प्रदाय॥२५॥
बलिदानं तत्तत्पूजाक्रमोक्तविधिना॥२५॥
विशिष्ट-विशिष्ट पूजा के अन्त में विविध प्रकार के बलि विधान शास्त्रों
में वर्णित हैं। उन्हीं के अनुसार यहाँ भी बलि करनी चाहिये॥२५॥
महाव्याहृतिहोममाह
१. ॐ भूरग्नये च पृथिव्यै च महते च स्वाहा।