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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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२१२ परशुरामकल्पसूत्रम्
हविःशेषमात्मसात्कारः श्रीक्रमवत्। आत्मसात्कुर्यात् इत्येवोक्त्या अत्र
सामयिकाभावः सूचितः। शिवमिति व्याख्यातमेव।।२८।।
।। इति श्रीपरशुरामकल्पसूत्रे श्रीरामेश्वरनिर्मितायां श्रीपरशुरामकल्पसूत्रवृत्तौ
सौभाग्योदयनाम्न्यां (मुख्यांशमात्रायां) पराक्रमो
नामाष्टमः खण्डः सम्पूर्णः ।।८।।
हविःशेष स्वीकार करने के पहले 'सौः' मन्त्र से आत्मतत्त्व, विद्यातत्त्व
और शिवतत्त्व का शोधन करना चाहिये। परापूजा की हवि स्वयं या
स्वसन्ततिक्रमस्थ व्यक्ति को ही देनी चाहिये, दूसरे को नहीं। इति शिवम्।।२८।।
।। श्रीरामेश्वरकृत मुख्यांश-सौभाग्योदयवृत्तिसहित
डॉ. परमहंसमिश्रकृत नीर-क्षीर-विवेक भाषा-भाष्य-समन्वित
श्रीपरशुरामकल्पसूत्र का पराक्रम नामक अष्टम खण्ड परिपूर्ण ।।८।।
।। इति शिवम्।।