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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

पृष्ठ 235, कुल 320 में से

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पृष्ठ 235

वाराहीक्रमः १९३
षडावरणपूजानन्तरं कर्त्तव्यां क्रियामाह—पुनरिति। सर्वैरुपचारैः पूर्वोक्त-
षोडशोपचारैरुपचर्य ।।३३।।
छः आवरणों की पूजा-विधि का वर्णन सूत्र-संख्या ३२ तक हो चुका,
इसके बाद क्या करना चाहिये, इस जिज्ञासा के उत्तर में सूत्रकार कह रहे हैं
कि, देवी का त्रिधा सन्तर्पण होना चाहिये और अन्त में सोलह उपचारों से माँ
की पूजा की जानी चाहिये। इससे माँ परम प्रसन्न होती है।।३३।।
अथ बलिदानप्रकारं वक्तुं प्रक्रमते
पुरतो वामभागे हस्तमात्रं जलेनोपलिप्य रुधिरान्नहरिद्राऽन्न-
महिषपलसक्तुशर्करा-हेतुफलत्रय-माक्षिकमुद्गत्रय-माषचूर्णदधिक्षीर-
घृतैः शुद्धोदनं सम्मर्द्य चरणायुधाण्डप्रमाणान् दशपिण्डान् विधाय,
तत्र निधाय कपित्थपलमानमेकं पिण्डं च तत्समीपे सादिमोपादिम-
मध्यमं चषकं च निक्षिप्य दशपिण्डान् हेतुकादिभ्यो मध्यमपिण्डं
चषकं च चण्डोच्चण्डाय तत्तन्मन्त्रैर्दत्त्वा वृन्दमाराध्य ।।३४।।
देव्या इति शेषः। अथ द्रव्यमाह—रुधिरान्नेति। रुधिरेण रक्तेन युक्तम्
अन्नं हरिद्रायुक्तम्, अन्नं पलं मांसं सक्तवो भर्जितयवचणकचूर्णं हेतुः प्रथमं
फलत्रयं त्रिफला माक्षिकं पुष्परसः, मुद्गत्रयं त्रिजातिमुद्गाः। शेषं स्पष्टम्। एतैः
शुद्धोदनं संमर्द्य मिश्रितं कृत्वा। चरणायुधः कुक्कुटः, कुक्कुटश्चरणायुध
इत्यमरः। तत्र पूर्वलिप्तदेशे तत्समीपे दशपिण्डसमीपे। दशपिण्डस्थापनं च
प्रागादिदशदिक्षु पूजायामासां दिशां क्लृप्तत्वात् तत्तन्मन्त्रैः पूजायां क्लृप्तमन्त्रैः।
तत्रापि नमोऽन्तैरेव, न श्रीपादुकेत्यादि मन्त्रशेषः। वृन्दमाराध्येति हेतुकादि-
चण्डोच्चण्डान्तवृन्दमित्यर्थः। अत्र पाठक्रमं बाधित्वाऽर्थक्रमेण आदौ आराधनं
पश्चाद् बलिदानं ज्ञेयम्, तत्रापि बाधकाभावात् पदार्थानुसमयेनाभ्यर्चनं
पञ्चोपचारैः कार्यम् ।।३४।।
सामने आगे ही बायें भाग में एक हाथ वर्गाकार जल से उपलिप्त कर
वहीं दश पिण्डों का निर्माण करना चाहिये। पिण्डों के द्रव्य के रूप में रक्तमिश्रित
अन्न, हरिद्रामिश्रित अन्न, मांस, सक्तु, शर्करा, हेतु, द्रव्य, त्रिफला, माक्षिक