परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 181, कुल 320 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्यामाक्रमः १३९
पुनः शरीरोत्पादनार्थम्। 'लं' इति पार्थिवबीजेन सिक्तभस्मनि काठिन्य-
सम्पादनम्। ततस्तस्मिन् 'हंस' इति मन्त्रेण शिवचैतन्यसम्पादनम्।
एतावत्पर्यन्तं भूतशुद्धिं विधाय श्रीक्रमोक्तां प्राणप्रतिष्ठां च कुर्यात् ।।९।।
य,र,ल और व ये चारों अन्तःस्थ वर्ण कहलाते हैं। इन पर अनुस्वार
का प्रयोग इनमें आन्तरिक रूप से वर्त्तमान ऊर्जा को आन्दोलित और उच्छलित
कर देता है। इनका वैद्युतिक उल्लास इन्हें महत्त्वपूर्ण बना देता है।
अनुस्वारयुक्त 'य'कार वायुबीज, 'र'कार अग्निबीज, 'व'कार अमृत-(वरुण-
विष्णु) बीज और 'ल'कार पार्थिव-बीज बन जाता है। जैसे बीज से वृक्ष बनता
है और वृक्ष में तना, शाखा, प्रशाखा, पत्र, पुष्प और फल उत्पन्न होते हैं,
उसी तरह इन वर्ण बीजों से सम्बद्ध तत्त्वों का समुच्छलन होता रहता है।
इनके प्रयोग का सामर्थ्य साधक योगी प्राप्त कर लेता है। गुरु शिष्य को इसकी
शिक्षा देता है। इसके प्रयोग से शिष्य की भूतशुद्धि सम्पन्न हो जाती है।
इन वर्ण बीजों में ये ऊर्जायें कैसे समुद्भूत होती हैं। यह ज्ञान आवश्यक है।
यह तन्त्र का विषय है। बीजों का मानसिक संकल्प होना चाहिये। इन्हें बोलकर
नहीं कहना चाहिये।
यह प्राणचार की प्रक्रिया है। बीजमन्त्र बोलते हुए वायु का आकर्षण कैसे
होता है, इसकी विधि है। गुरु से इसे जानना चाहिये। वायु के आकर्षण में
इडा और पिङ्गला नाडियों का प्रयोग होता है। वाम नासिका वाली पिङ्गला होती
है और दक्षनासा में इडा का अवस्थान होता है।
'य' में अनुस्वार का प्रयोग वायु को ऊर्जस्वल बनाता है। इस बीज के
प्रयोग से शरीर को शुष्क बनाने का ध्यान करना चाहिये। मानो वह सूखे इन्धन
के समान हो गया हो अर्थात् जलांश का आकर्षण कर लिया गया हो।
इसके बाद अग्निबीज से देह-दाह की प्रक्रिया अपनानी चाहिये। देह
अग्निबीज के प्रयोग से भस्म हो गया है। इस ध्यान के उपरान्त वरुण बीज
से उसका सेचन करना चाहिये। अमृतसिञ्चन से पुनः शरीरोत्पादन की क्षमता
आती है। ऐसे अवसर पर ही पृथ्वी बीज का प्रयोग होना चाहिये। इससे भस्म
कठिन और शिवत्व संधारण के योग्य हो जाता है। तत्पश्चात् 'हंस' मन्त्र से
शरीर में शिवचैतन्य का सम्पादन करना चाहिये।