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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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पाशास्मर वाग्भव ब्लूं पदनित्यमदद्रवे वर्म फ्रें मायेति नीलपताका।
१२. भमरयऊमिति विजया। १३. स्वौमिति सर्वमङ्गला।
१४. तारो नमो भगवति ज्वालामालिनि देवदेवि सर्वभूतसंहार-
कारिके जातवेदसि ज्वलन्ति ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल त्रिजातियुक्त
मायारेफसप्तकज्वालामालिनि वर्मफडग्निजायेति ज्वालामालिनी।
१५. (अं) च्कौं इति चित्रा। इति पञ्चदश नित्याः। प्रथमत्र्यस्ररेखा-
स्थितपञ्चदशस्वरेषु पूज्याः, विसृष्टौ षोडशीं मूलविद्यया
चाभ्यर्च्य ॥९॥
वाक् ऐं। शेषं यथापठितम्। मन्त्रान्ते सर्वत्र तत्तन्नित्यानाम। तदुत्तरं
अष्टाक्षरी-योगः। यथा आदौ त्रितारी ऐं सकल ह्रीं नित्यक्लिन्ने मदद्रवे सौः
कामेश्वरी नित्या श्रीपादुकां पूजयामि नम इति। एवमग्रेऽपि द्रष्टव्यम्। यद्यपि
श्रीपादु