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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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पृष्ठ 139

श्रीक्रमः ९७
एतदर्घ्यशोधनमिति शिवम् ।।३२।।
एतत् कुण्डलिन्यां जुहुयाद् इत्यन्तं कर्म अर्घ्यशोधनम् अर्घ्यसंस्कारः।
शिवमित्यनेन अर्घ्यप्रकरणसमाप्तिः सूचिता।।३२।।
।। इति श्रीपरशुरामकल्पसूत्रे श्रीरामेश्वरनिर्मितायां सौभाग्योदयनाम्न्यां
परशुरामकल्पसूत्रवृत्तौ (मुख्यांशमात्रायां) श्रीक्रमो नाम तृतीयः खण्डः सम्पूर्णः ।।
अर्घ्य विधि एक असामान्य महत्त्व की विधि है। कुण्डलिनी होमरूप
आध्यात्मिक याग से पूर्णतया अर्घ्यसंस्कार सम्पन्न होतां है और प्रकरण भी पूर्ण
होता है।।३२।।
।। श्रीरामेश्वरकृत मुख्यांश सौभाग्योदयवृत्तिसहित
डॉ. परमहंसमिश्रकृत नीर-क्षीर-विवेक भाषा-भाष्य-समन्वित
श्रीपरशुरामकल्पसूत्र का श्रीक्रम नामक तृतीय खण्ड परिपूर्ण ।।३।।
।। शुभं भूयात् ।।