पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 64, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ें५२ पराशरस्मृतिः [ षष्ठो-
भेरुण्डं चाषं भासांश्च पारावत कपिञ्जलान्¹।
पक्षिणां चैव सर्वेषामहोरात्रमभोजनम् ॥ ८ ॥
भेरुण्ड, चाष ( नीलकण्ठ या गरुड़ ), भास, पारावत और कपिंजल
( पपीहा ) आदि पक्षियों को मारने से एक दिन-रात भोजन न करे
तो शुद्धि होती है ॥८॥
हत्वा मूषक-मार्जार-सर्पा-ऽजगर-डुण्डुभान् ।
कृसरं भोजयेद् विप्रान् लौहदण्डं च दक्षिणाम् ॥ ९ ॥
चूहा, बिल्ली, सांप, अजगर और डोंड़हा सर्प को मारे तो कृसरान्न
( खिचड़ी ) ब्राह्मणों को खिलाकर लोहे का डण्डा दक्षिणा में देवे तब
उसकी शुद्धि होती है ॥९॥
शिशुमारं तथा गोधां हत्वा कूर्मं च शल्यकम्² ।
वृन्ताकफलभक्षी ³चाऽप्यहोरात्रेण शुद्ध्यति ॥१०॥
शिशुमार ( सूइस ), गोधा ( गोह ), कछुआ तथा साही को
मारने से वृन्ताक का फल खाकर दिन-रात रहने से शुद्धि
होती है ॥१०॥
वृक जम्बुक ऋक्षाणां तरक्षूणां च घातने⁴ ।
तिलप्रस्थं द्विजे दद्याद् वायुभक्षो दिनत्रयम् ॥११॥
भेड़िया, सियार, भालू तथा तरक्षु ( गैंडा ) को मारे तो एक
प्रस्थ तिल ब्राह्मण को देवे और तीन उपवास करे तब शुद्धि
होती है ॥११॥
गजस्य च तुरङ्गस्य महिषोष्ट्रनिपातने ।
प्रायश्चित्तमहोरात्रं त्रिसन्ध्यमवगाहनम् ॥१२॥
१. 'कपिञ्जली' इति । २. 'शल्यकं' इति । ३. 'वा' इति । ४. 'घातकः' इति ।