पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता ५१
बलाका-टिट्टिभौ वाऽपि शुक-पारावतावपि ।
अटीन-बकघाती च शुद्धयते नक्तभोजनात् ॥ ३ ॥
बलाका, टिट्टिभ, तोता, पारावत ( पनडुब्बी पक्षी ), अटीन तथा
बकुले को मारकर दिन में उपवास कर रात में भोजन करे तो शुद्धि
होती है ॥३॥
वृक-काक कपोतानां सारी तित्तिरघातकः ।
अन्तर्जले उभे सन्ध्ये प्राणायामेन शुद्धयति ॥ ४ ॥
वृक ( भेड़िया ) कौवा, कबूतर, मैना तथा तित्तिर को मारकर
जल के बीच सायंकाल एवं प्रातःकाल प्राणायाम करे तो शुद्धि
होती है ॥४॥
गृध्र श्येन शशादीनामुल्लूकस्य च घातकः ।
अपक्वाशी दिनं तिष्ठेत् त्रिकालं मारुताशनः ॥ ५ ॥
गिद्ध, वाज, खरगोश और उल्लू को मारने से पहले दिन बिना पका
हुआ तथा दूसरे दिन तीसरे पहर भोजन कर, तीसरे दिन उपवास
रहने से शुद्धि होती है ॥५॥
वल्गुली टिट्टिभानां च कोकिला खञ्जरीटके ।
लाविका रक्तपक्षेषु शुद्धयते नक्तभोजनात् ॥ ६ ॥
बल्गुली, टिट्टिभ, कोयल, खिरहिच, बटेर तथा जिनके पंख लाल
हों इस प्रकार के पक्षियों को मारकर दिन में उपवास करे, पश्चात्
रात्रि में भोजन करे तो शुद्धि होती है ॥६॥
कारण्डव चकोराणां पिङ्गला कुररस्य च ।
भारद्वाजादिकं हत्वा शिवं सम्पूज्य शुद्धयति ॥ ७ ॥
कारण्डव, चकोर, पिंगला, कुरर तथा भारद्वाज आदि पक्षियों को
मारे तो भगवान् शंकर की पूजा कर शुद्ध होता है ॥७॥