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पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

ऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता ३
उस बदरीवन में ऋषि-सभा के बीच शक्ति के पुत्र महर्षि
पराशर१ बैठे हुए थे, वे उस समय प्रधान-प्रधान मुनियों से घिरे
हुए थे ॥ ८ ॥
कृताञ्जलिपुटो भूत्वा व्यासस्तु ऋषिभिः सह ।
प्रदक्षिणाऽभिवादैश्च स्तुतिभिः समपूजयत् ॥ ९ ॥
उनको देखकर महर्षि वेदव्यास ने ऋषियों के सहित हाथ जोड़-
कर, उनकी प्रदक्षिणा की, पश्चात् अभिवादन और स्तुति कर उनकी
पूजा की ॥ ९ ॥
अथ सन्तुष्टहृदयः पराशरमहामुनिः ।
आह सुस्वागतं ब्रूहीत्यासीनो मुनिपुङ्गवः ॥ १० ॥
महर्षि वेदव्यास के इस प्रकार विनय, प्रदक्षिणा, अभिवादन एवं
स्तुति से सभा के मध्य में बैठे हुए महर्षि पराशर अत्यन्त प्रसन्न हुए
और उन्होंने व्यासजी का सुस्वागत एवं कुशल पूछा ॥ १० ॥
कुशलं सम्यगित्युक्त्वा व्यासः पृच्छत्यनन्तरम् ।
यदि जानासि मे भक्तिं स्नेहाद् वा भक्तवत्सल ! ॥११॥
१. 'पराशूताः शरा यस्मात् राक्षसानां वधार्थिनाम् ।
अतः पराशरो नाम ऋषिश्छक्तो मनीषिभिः ।'
अन्यच्च —
'परस्य कामदेवस्य शराः सम्मोहनादयः ।
न विद्यन्ते यतस्तेन ऋषिश्छक्तः पराशरः ॥'
अन्यत्रापि—
'परेषु पापचित्तेषु नादत्त कोपलक्षणम् ।
शरं यस्मात्ततः प्रोक्तः ऋषिरेव पराशरः ॥
परं मातुर्निजाया यदुदरं तदयं गतः ।
ऋचमुच्चार्य निर्भद्य निरगात् स पराशरः ॥'