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पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)

पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)

Panchasayaka of Kavishekhara Jyotirishvara with Commentary

कविशेखर ज्योतिरीश्वर (सम्पादक: पं. श्रीधर शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished109 पृष्ठ

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पृष्ठ 22

( ७ )
(विषयाः) पृष्ठाङ्काः श्लोकाङ्काः
स्फुरिताख्यचुम्बनम् ६४ ४१
घृष्टस्वरूपम् ,, ४२
पीडितस्वरूपम् ६५ ४३
सम्पुटस्वरूपम् ,, ४४
समौष्ठस्वरूपम् ,, ४५
(१५) नखाघातसमुद्देश ,,
नखक्षतस्थानानि ,, ४६
च्छुरितकलक्षणम् ६६ ४७
अर्द्धेन्दुसंज्ञकस्वरूपम् ,, ४८
मण्डलस्वरूपम् ,, ४९
शशप्लुतलक्षणम् ,, ५०
मयूरपादस्वरूपम् ६७ ५१
पंकजप्रभकस्वरूपम् ,, ५२
दर्दुरस्वरूपम् ,, ५३
नखक्षतानां कामावेशजनकत्वम् ,, ५४
करजक्षतानां कामसर्वस्वम् ,, ५५
(१६) दशनाघातसमुद्देश ,,
दशनाघातप्रकाराः ६८ ५६
दशनाघातस्थानानि ,, ५७
(१७) केशाकर्षणसमुद्देश· ,,
स्पर्शोचिताः केशाः ,, ५८
केशाकर्षणप्रकारः ,, ५९
[ पञ्चमः सायक ] ६९
(१) नाडीसमुद्देश ,,
तिस्रो भगनाड्यः ,, १
गभीरणाख्या नाडी ,, २
(विषया ) पृष्ठाङ्काः श्लोकाङ्काः
चान्द्रमसा नाडी ६९ ३
गौरीनाडी स्वरूपम् ,, ४
२) उत्तानबन्धसमुद्देशः ७०
तत्तद्बन्धाश्रयणे हेतुप्रदर्शनम् ,, ५
बन्धविशेषाश्रयणे ज्ञातव्या विषया ,, ६
उत्तानबन्धाविधानम् ,, ७
समपदबन्धविधानम् ७१ ८
नागरबन्धविधानम् ,, ९
व्योमपदबन्धविधानम् ,, १०
त्रैविक्रमबन्धः ,, ११
चातुकैपिलुकबन्धः ७२ १२
अपदारितबन्धः ,, १३
(३) पार्श्वबन्धसमुद्देशः ,,
उपवातकबन्धस्वरूपम् ,, १४
सम्पुटबन्धस्वरूपम् ७३ १५
नागबन्धस्वरूपम् ,, १६
(४) उपविष्टबन्धसमुद्देश ,,
पद्मासनबन्धस्वरूपम् ,, १७
कान्तिबन्धस्वरूपम् ७४ १८
(५) अधोमुखसमुद्देशः ,,
हरिणबन्धस्वरूपम् ,, १९
दन्तावलिदिवन्धः ,, २०
(६) ऊर्ध्वबन्धसमुद्देशः ७४
व्यात्तस्वरूप ,, २१
त्रिपादबन्धः ,, २२