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सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 98

६२ कुंडलीया
निमिख भरे१ को खुसी जन्म कोटिन दुख पावै ।
चौरासी घर जाय आपु में आपु बंधावै ॥
स्वान लाख जो खाय दिया चाटै पै चाटै ।
छुटै न जिउ की खोय पकरि के पुरजे काटै ॥
पलटू भजै न नाम को मूरख नर तन पाय ।
देखो जिउ की खोय को फिर फिर गोता खाय ॥
( २३० )
मुए पार की बात है फिरै न कोऊ एक ।
फिरै न कोऊ एक मुक्ति धौं कैसी होती ।
स्याह जरद या सुरख रंग, हीरा या मोती ॥
मुक्ति के हाथ न पाँव मुक्ति को सब कोउ मानै ।
है पर्दे की बात ताहि से सब कोउ जानै ॥
सब कोउ होय खराब मुक्ति के पाछे जाई ।
जानी केहि बिधि जाय मुक्ति कहु किन ने पाई ॥
पलटू बातैं मुक्ति की खसर-फसर२ करि देख ।
मुए पार की बात है फिरै न कोऊ एक ॥
( २३१ )
चिन्ता रूपी अगिन में जरै सकल संसार ॥
जरै सकल संसार जरत निरपति को देखा ।
बादसाह उमराव जरत हैं सैयद सेखा ॥
सुर नर मुनि सब जरैं जोगी और जती सन्यासी ।
पंडित ज्ञानी चतुर जरैं कनफटा उदासी ॥
जंगम सिवरा जरैं जरैं नागा बैरागी ।
तपसी दूना जरै बचै नहिं कोऊ भागी ॥
पलटू बचते संत जन जेकरे नाम अधार ।
(१) छिन भर । (२) सरपट ।