सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

पृष्ठ 95, कुल 116 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 95

पलटू साहिब की बानी भाग - १ ८६
( २२२ )
निन्दक है परसवारथी करै भक्त का काम ॥
करै भक्त का काम जगत में निन्दा करते ।
जो वे होते नाहिं भक्त कहवाँ से तरते ॥
आप नरक में जाहिं भक्त का करें निबेरा ।
फिर भक्तन के हेतु करें चौरासी फेरा ॥
करें भक्त की सोच उन्हें कुछ और न भावै ।
देखो उनकी प्रीति लगन जब ऐसी लावै ॥
पलटू धोबी अस मिल्यौ धोवत है बिनु दाम ।
निन्दक है परसवारथी करै भक्त का काम ॥
॥ मिश्रित ॥
( २२३ )
बनिया पूरा सोई है जो तौलै सत नाम ॥
जो तौलै सत नाम छिमा का टाट बिछावै ।
प्रेम तराजू करै बाट बिस्वास बनावै ॥
बिबेक की करै दुकान ज्ञान का लेना देना ।
गादी है संतोष नाम का मारै टेना ॥
लादै उलटै भजन बचन फिर मीठे बोलै ।
कुंजी लावै सुरत सबद का ताला खोलै ॥
पलटू जिसकी बन परी उसी से मेरा काम ।
बनिया पूरा सोई है जो तौलै सत नाम ॥
( २२४ )
भीतर औटै तत्व को उठै सबद की खानि ॥
उठै सबद की खानि रहै अंतर लौ लागी ।
सुरति देइ उदगारि१ जोगिनी आपुइ जागी ॥
(१) जगाय ।
१२