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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 93

पलटू साहिब की बानी भाग १ ८७
जाति न पूछै कोय हरी को भक्ति पियारी ।
जो कोई करै सो बड़ा जाति हरि नाहिं निहारी ॥
बधिक अजामिल रहे रहे फिर सदन कसाई ।
गनिका बिस्वा रही बिमान पै तुरत चढ़ाई ॥
नीच जाति रैदास आपु में लिया मिलाई ।
लिया गिद्ध को गोदि दिया बैकुंठ पठाई ॥
पलटू पारस के छुए लोहा कंचन होय ।
हरि को भजै सो बड़ा है जाति न पूछै कोय ॥
( २१५ )
साहिब के दरबार में केवल भक्ति पियार ॥
केवल भक्ति पियार साहिब भक्ती में राजी ।
तजा सकल पकवान लिया दासीसुत भाजी¹ ॥
जप तप नेम अचार करै बहुतेरा कोई ।
खाये सेवरी के बेर¹ मुए सब ऋषि मुनि रोई ॥
किया युधिष्ठिर यज्ञ बटोरा सकल समाजा ।
मरदा सब का मान सुपच बिनु घंट न बाजा ॥
पलटू ऊँची जाति कौ जनि कोउ करें हंकार ।
साहिब के दरबार में केवल भक्ति पियार ॥
( २१६ )
गनिका गिद्ध अजामिल सदना औ रैदास ॥
सदना औ रैदास भली इनकी बनि आई ।
निसु दिन रहें हजूर भक्ति कीन्ही अधेकाई ॥
जाति न उत्तम येह इन्हैं सम और न कोई ।
(१) श्रीकृष्ण ने राजा दुर्योधन का छप्पन प्रकार का भोजन त्याग कर बिदुर
भक्त का अलोना साग बड़ी रुचि से खाया था और सेवरी के कुतरे हुए बेर बड़े चाव
से चख कर अहंकारी ऋषियों और मुनियों के दाँत खट्टे किये ।