पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८६ कुंडलिया
पलटू हम को देखि कै लोगन के भा रोग ।
मैं अपने रंग बावरी जरि जरि मरते लोग ॥
॥ जीव-हिंसा ॥
( २१५ )
लहम कुल्लहुम जिसिम का नबी किया फर्मूद१ ॥
नबी किया फर्मूद हदीस की आयत माहीं ।
सब में एकै जान और कोउ दूजा नाहीं ॥
खून गोस्त है एक मौलवी जिबह न छाजै२ ।
सब में रोसन हुआ नबी का नूर बिराजै ॥
क्यों खैंचै तू रूह३ गुनहगारी में पड़ता ।
बुजरुग के फर्मूद बमोजिब नहीं डेरता ॥
पलटू जो बेदरदी सो काफिर मरदूद ।
लहम कुल्लहुम जिसिम का नबी किया फर्मूद ॥
( २१६ )
गरदन मारै खसम की लगवारन के हेत ॥
लगवारन के हेत पसू औ मेंढ़ा मारै ।
पूजै दुरगा देव देवखरी सिर दै मारै ॥
माटी देवखरि बाँधि मुए की पूजा लावै ।
जीवत जिउ को मारि आनि कै ताहि चढ़ावै ॥
सब में है भगवान और ना दूजा कोई ।
तेकर यह गति करै भला कहवाँ से होई ॥
पलट जिउ को मारि कै बल देवतन को देत ।
गरदन मारै खसम की लगवारन के हेत ॥
॥ जाति भेद ॥
( २१७ )
हरि को भजै सो बड़ा है जाति न पूछै कोय ॥
(१) नबी ने फर्माया है कि कुल माँस जानदार की देह से आता है। (२) शोभा
नहीं देता । (३) जान ।