पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ ८३
( २०७ )
लिये कुल्हाड़ी हाथ में मारत अपने पाँय ॥
मारत अपने पाँय पूजत है देई देवा ।
सतगुरु संत बिसारि करै भूतन की सेवा ॥
चाहै कुसल गँवार अमी दै माहुर खावै ।
मने किये से लड़ै नरक में दौड़ा जावै ॥
पौंडै१ जल के बीच हाथ में बाँधे रसरी ।
परै भरम में जाइ ताहि को कैसे पकरी ॥
पलटू नर तन पाइ कै भजन मँहै अलसाय ।
लिये कुल्हाड़ी हाथ में मारत अपने पाँय ॥
( २०८ )
सात पुरी हम देखिया देखे चारो धाम ॥
देखे चारो धाम सबन माँ पाथर पानी ।
करमन के बसि पड़े मुक्ति की राह भुलानी ॥
चलत चलत पग थके छीन भइ अपनी काया ।
काम क्रोध नहिं मिटे बैठ कर बहुत नहाया ॥
ऊपर डाला धोय मैल दिल बीच समाना ।
पाथर में गयो भूल संत का मरम न जाना ॥
पलटू नाहक पचि मुए सन्तन में है नाम ।
सात पुरी हम देखिया देखे चारो धाम ॥
( २०६ )
घर में मेवा छोड़ि कै टेंटी बीनन जाय ॥
टेंटी बीनन जाय जानै येही है मेवा ।
तीरथ मँहै नहाय करै मूरति की सेवा ॥
छोड़ि बोलता ब्रह्म करै पथरे की पूजा ।
खसम न आवै पास नारि जब खोजै दूजा ॥
(१) तैरै।