सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 116 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 88

८२ कुंडलिया
मन में भया अनन्द छूटि गइ सब दुचिताई ॥
उन कै इहवै हेतु¹ रह यह हमरी आवै ।
इहै बूझि कै हँसै हाथ से निबुका² जावै ॥
पलटू सब का एक मत को अब करै बिचार ।
सुधी मारग मैं चलौं हँसै सकल संसार ॥
(२०५)
भरमि भरमि सब जग मुवा झूठा देवा सेव ॥
झूठा देवा सेव नाम को दिया भुलाई ।
बाँधे जमपुर जाहिं काल चोटी घिसियाई ॥
पानी से जिन पिंड गरभ के बीच सँवारा ।
ऐसा साहिब छोड़ि जन्म औरै से हारा ।
ऐसे मूरख लोग खबर ना करैं अपानी ।
सिरजनहारा छोड़ि पूजते भूत भवानी ॥
पलटू इक गुरुदेव बिनु दूजा कोय न देव ।
भरमि भरमि सब जग मुवा झूठा देवा सेव ॥
(२०६)
संत चरन को छोड़ि कै पूजत भूत बैताल ॥
पूजत भूत बैताल मुए पर भूतै होई ।
जेकर जहवाँ जीव अन्त को होवै सोई ॥
देव पितर सब झूठ सकल यह मन की भ्रमना ।
यही भरम में पड़ा लगा है जीवन मरना ॥
देई देवा सेइ परम पद केहि ने पावा ।
भैरौ दुर्गा सीव बाँधि कै नरक पठावा ॥
पलट अंत घसीटिहै चोटी धरि धरि काल ।
संत चरन को छोड़ि कै पूजत भत बैताल ॥
(१) संसार का यही अभिप्राय है । (२) निकला ।