पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग-१ ७७
आगे भोजन धरा थारि में खाता नाहीं।
भूख भूख करै सोर कौन डारै मुख माहीं ॥
दीया बाती तेल आगि है नाहिं जरावै।
खसम सोया है पास खसम को खोजन जावै ॥
पलटू डगरा१ सूध अटकि कै परता गिर गिर।
पानी का को देइ प्यास से मुवा मुसाफिर ॥
( १६३ )
लहँगा परिगा दाग फूहरि साबुन से धोवै ॥
फूहरि धोवै दाग छुटै ना और बढ़ावै।
ज्यों ज्यों मलै बनाय सारे लहँगा फैलावै ॥
गाफिल में गइ सोय खसम को दोष लगावै।
ऐसी फूहरि नारि आप को नाहिं बचावै ॥
धोबी को नहिं देइ घरहिं में आपु छुड़ावै।
इक बेर दिहिसि निखारि लाज से नाहिं दिखावै ॥
पलटू परदा खोलि आपनौ घर घर रोवै।
लहँगा परिगा दाग फूहरि साबुन से धोवै ॥
( १६४ )
अँधरन केरि बजार में गया एक डिठियार ॥
गया एक डिठियार सबै अंधा उठि धाये।
अहमक आये आजु सबै मिलि तारो लाये ॥
डारौ आँखि फोरि रहौ तुम हमरी नाईं ।
सब अँधरन मिलि अंध अंध वा को ठहराई ॥
जँहवाँ लाखन अंध एक क्या करै बिचारा।
सुनै न वा की कोऊ तहाँ डिठियारै हारा ॥
पलटुदास यहि बात को कोऊ न करै बिचार।
(१) रास्ता ।