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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 82

मन माया छोड़ै नहीं भझै आपु से जाय ॥
॥ अज्ञानता ॥
( १६० )
घर में जिन्दा छोड़ि कै मुरदा पूजन जायँ ॥
मुरदा पूजन जायँ भोति को सिरदा१ नावैं ।
पान फूल और खाँड़ जाइ कै तुरत चढ़ावैं ॥
ताल कि माटी आनि ऊँच कै बाँधिनि चौरी ।
लीपि पोति के धरिनि पूरी औ बरा कचौरी ॥
पीयर लूगा२ पहिरि जाइ कै बैठिनि बूढ़ा ।
भरमि भरमि अभुवाई माँगत हैं खसी३ कै मँड़ा ॥
पलटू सब घर बाँटि कै लै लै बैठे खायँ ।
घर में जिंदा छोड़ि कै मुरदा पूजन जायँ ॥
( १६१ )
जियतै देइ गिरास ना मुए परावै पिंड ॥
मुए परावै पिंड कौन है खावनहारो ।
राँध परोसिनि नेवति खवावै ससुरा सारो ॥
पितरन के मुँह छार धोख दै लेइ बड़ाई ।
मुए बैल को घास देहु कहु कैसे खाई ॥
अपने परुसा४ लेइ पित्र को छोड़ै पानी ।
करै पित्र से भूत बड़ो मूरख अज्ञानी ॥
पलटू पुरषा मुक्ति में करत भंड औ भिंड ।
जियतै देइ गिरास ना मुए परावै पिंड ॥
( १६२ )
पानी का को देइ प्यास से मुवा मुसाफिर ॥
मुवा मुसाफिर प्यास डोर औ लुटिया पासै ।
बैठ कुवाँ की जगत जतन बिनु कौन निकालै ॥
(१) सिजदा = दंडवत । (२) कपड़ा । (३) बकरा । (४) परोसा, पत्तल ।