पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished116 पृष्ठ
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७५ कुंडलिया
पलटू डरपै संत से वे मारैं पैजार ॥
माया बड़ी बहादुरी लूटि लिहा संसार ॥
( १८५ )
माया की चक्की चलै पीसि गया संसार ॥
पीसि गया संसार बचै ना लाख बचावै ।
दोऊ पट के बीच कोऊ ना साबित जावै ॥
काम क्रोध मद लोभ चक्की के पीसनहारे ।
तिरगुन डारै झीक१ पकरि कै सबै निकारे ॥
दुरमति बड़ी सयानि सानि कै रोटी पोवै ।
करम तवा में धारि सेंकि कै साबित होवै ॥
तृस्ना बड़ी छिनारि जाइ उन सब घर घाला ।
काल बड़ा बरियार किया उन एक निवाला ॥
पलटू हरि के भजन बिनु कोऊ न उतरै पार ।
माया की चक्की चलै पीसि गया संसार ॥
( १८६ )
नागिनि पैदा करत है आपुइ नागिनि खाय ॥
आपुइ नागिनि खाय नागिनि से कोय न बाचै ।
नेजाधारी सम्भु नागिनि के आगे नाचै ॥
सिंगी ऋषि को जाय नागिनि ने बन में खाई ।
नारद आगे पड़े लहर उन्हूँ को आई ॥
सुर नर मुनि गनदेव सभन को नागिनि लीलै ।
जोगी जती औ तपी नहीं काहू को ढीलै२ ।
सन्त बिबेकी गरुड़ हैं पलटू देखि डेराय ।
नागिनि पैदा करत है आपुइ नागिनि खाय ॥
( १८७ )
कुसल कहाँ से पाइये नागिनि के परसंग ॥
(१) मुट्ठी मुट्ठी अनाज जो चक्की में डालते हैं । (२) छोड़े ।