पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 70, कुल 116 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ कुंडलिया
पलटू मैं तो पतित हौं किये असुभ सब काज ।
पतितेपावन बाना धर्यो तुमहिं परी है लाज ॥
( १६० )
दीनन पर दाया करौ सुनिये दीनदयाल ॥
सुनिये दीनदयाल दीन को बहुत निवाजा ।
भया अभीखन दीन किया लंकापति राजा ॥
रिपु रावन की बधू दीन है बिनती कीन्हा ।
सिलोचना पति सीस मुक्ति सायुज्य सो दीन्हा ॥
ब्रह्मै कीन्हौ द्रोह गयौ बछरा हरि आनी१ ।
दीन भया जब आय मित्रता वा से मानी ॥
पलटू पावै भक्ति को लेहु जक्त जंजाल ।
दीनन पर दाया करौ सुनिये दीनदयाल ॥
( १६१ )
पलटू पूछै हंस से बिनती कै कर जोर ॥
बिनती कै कर जोर साच तुम बात बतावौ ।
भई साहिबी तोर नर्क से जीव बचावैौ ॥
अंधा पंगुल लूल सबन कौ मिलै ठिकाना ।
इक इक सब के हाथ नाम का द्यो परवाना ॥
संत रूप अवतार लियौ परस्वारथ काजां ।
चौरासी चौखान सबन के तुम हौ राजा ॥
जीव तरै जब जक्त कौ तब तुम बंदीछोर ।
पलटू पूछै हंस से बिनती कै कर जोर ॥
॥ दीनता ॥
( १६२ )
मन मिहीन करि लीजिये जब पिउ लागै हाथ ॥
( १ ) कथा है कि ब्रह्मा श्रीकृष्ण की परीक्षा के लिये उन के सब बछड़े हर कर
अपने लोक को ले गये जिस पर श्रीकृष्ण ने वैसे ही बछड़े तुर्त रच लिये । यह लीला
देख कर ब्रह्मा बहुत लज्जित हुए ।